अमेरिका ने मध्य पूर्व में बढ़ाया सैन्य दबाव
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने का फैसला किया है। वाशिंगटन ने सैन्य विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है। इस कदम से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी वायुसेना की उन्नत क्षमताएं तैनात की जा रही हैं। यह रणनीतिक पुनर्व्यवस्था का हिस्सा मानी जा रही है।
उन्नत वायुशक्ति की तैनाती
पेंटागन ने एफ-35 और एफ-16 लड़ाकू विमानों को स्थानांतरित किया है। इनकी तैनाती खाड़ी देशों में की गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इसकी पुष्टि की है। यह कदम ईरानी गतिविधियों के जवाब में उठाया गया है। सैन्य विशेषज्ञ इसे महत्वपूर्ण बता रहे हैं।
अमेरिकी सैन्य बलों की तैनाती बढ़ाई जा रही है। यह अमेरिकी रक्षा नीति का हिस्सा है। क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को इससे जोड़ा जा रहा है। ईरान परमाणु समझौते को लेकर मतभेद बने हुए हैं। वार्ता प्रक्रिया अभी भी अटकी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
संयुक्त राष्ट्र ने शांति वार्ता का आह्वान किया है। यूरोपीय संघ ने संयम बरतने की सलाह दी है। क्षेत्रीय देश सतर्कता से स्थिति देख रहे हैं। इस्राइल ने अमेरिकी कदम का स्वागत किया है। सऊदी अरब ने भी सुरक्षा सहयोग मजबूत किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि तनाव बढ़ सकता है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है। तेहरान ने सैन्य जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बैठक बुलाई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित दिख रहा है।
भविष्य की रणनीति
अमेरिकी प्रशासन कूटनीतिक रास्ते खुले रखना चाहता है। सैन्य तैनाती दबाव बनाने का माध्यम है। दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहने की उम्मीद है। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह आवश्यक माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन जरूरी बताया जा रहा है।












