क्यूआंटास, एयरएशिया थाईलैंड और एयर इंडिया ने भारत की उड़ानें घटाईं
जेट ईंधन की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ान क्षमता कम हो रही है। क्यूआंटास, एयरएशिया थाईलैंड और एयर इंडिया ने भारत की उड़ानें कम कर दी हैं। यह कदम मुख्य रूप से ईंधन की बढ़ती लागत के कारण उठाया गया है। भारतीय बाजार में अब कम सीटें उपलब्ध होंगी। इससे यात्रियों को अधिक भाड़ा देना पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संगठन के मुताबिक, ईंधन की कीमतें विमानन उद्योग के लिए बड़ी चुनौती हैं। पिछले साल की तुलना में जेट ईंधन की कीमतें 90% तक बढ़ गई हैं। इससे एयरलाइंस को अपने रूट्स में कटौती करनी पड़ रही है। क्यूआंटास ने मुंबई-सिडनी जैसे प्रमुख रूट्स पर उड़ानों की संख्या घटाई है। एयरएशिया थाईलैंड ने भारत के छोटे शहरों की सेवाएं बंद कर दी हैं। एयर इंडिया ने भी लंबी दूरी की उड़ानों की आवृत्ति कम की है।
भारतीय बाजार पर पड़ा असर
इन उड़ान कटौती का असर सबसे ज्यादा यात्रियों पर पड़ेगा। व्यावसायिक यात्रियों को वैकल्पिक रूट्स खोजने होंगे। पर्यटन उद्योग को भी झटका लगेगा। हालांकि, बड़ी एयरलाइंस अभी भारत के बड़े शहरों का सेवा जारी रखेंगी। लेकिन क्षमता में कमी से टिकटों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस स्थिति पर नज़र रखना शुरू कर दिया है। सरकार एयरलाइंस को ईंधन करों में छूट देने पर विचार कर रही है। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
भविष्य में क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि जेट ईंधन की कीमतें कम होने तक उड़ान कटौती जारी रहेगी। कई एयरलाइंस अपने खर्चों को कम करने के लिए नए रूट्स तलाश रही हैं। भारत का घरेलू बाजार अभी भी मजबूत है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सीमित क्षमता चिंता का विषय है।
यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे पहले से बुकिंग करें। अचानक कटौती से फंसे हुए यात्रियों को एयरलाइंस से संपर्क करना चाहिए। फिलहाल, उद्योग को ईंधन की कीमतों में स्थिरता की जरूरत है।
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