दुनिया की सबसे बड़ी वायुसेना 6868 बचाव रेडियो खरीदेगी गिरे एयरक्रू के लिए

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अमेरिकी वायुसेना खरीदेगी 6,868 नई पीढ़ी के बचाव रेडियो

अमेरिकी वायुसेना ने साल 2027 से 6,868 नई पीढ़ी के सर्वाइवर रेडियो खरीदने का फैसला किया है। ये रेडियो बोइंग के CSEL रेडियो की जगह लेंगे। CSEL का इस्तेमाल ईरान में DUDE 44 बचाव अभियान में हुआ था। यह बदलाव युद्धक क्षमता को बेहतर बनाएगा।

नई पीढ़ी के रेडियो से पायलटों की सुरक्षा बढ़ेगी। ये रेडियो दुश्मन के इलाके में फंसे सैनिकों को बचाने में मदद करेंगे। अमेरिकी वायुसेना के अनुसार, यह तकनीक बहुत उन्नत है।

DUDE 44 अभियान और CSEL रेडियो की भूमिका

DUDE 44 मिशन ईरान में एक खोज और बचाव अभियान था। इसमें CSEL रेडियो ने अहम भूमिका निभाई। CSEL का मतलब है कॉम्बैट सर्वाइवर एवेटर लोकेटर। यह रेडियो जीपीएस और संचार सुविधाएं प्रदान करता है। लेकिन अब इसकी जगह नई तकनीक लेगी।

नई पीढ़ी के रेडियो में एन्क्रिप्टेड संचार और बेहतर बैटरी होगी। रक्षा समाचार के अनुसार, ये रेडियो 2027 से आपूर्ति होंगे। इससे सेना की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी।

नई तकनीक से सुरक्षा में सुधार

नए सर्वाइवर रेडियो में एडवांस फीचर होंगे। ये जैमिंग प्रतिरोधी और लंबी दूरी तक काम करेंगे। CSEL रेडियो 2000 के दशक से इस्तेमाल में है। अब इसे बदलने का समय आ गया है।

अमेरिकी वायुसेना का कहना है कि यह अपग्रेड बहुत जरूरी है। नई तकनीक से पायलटों की जान बचाना आसान होगा। लड़ाकू विमानों में ये रेडियो लगाए जाएंगे।

भविष्य की योजनाएं और प्रभाव

2027 से 2029 तक ये रेडियो आपूर्ति होंगे। इसकी लागत कई अरब डॉलर होगी। यह कार्यक्रम अमेरिकी सैन्य तकनीक में बड़ा बदलाव दिखाता है। CSEL रेडियो अब पुराना हो चुका है।

नए रेडियो से खोज और बचाव मिशन तेज होंगे। दुश्मन के इलाके में भी संचार मजबूत रहेगा। इससे सैनिकों का मनोबल बढ़ेगा। एयर फोर्स टाइम्स के अनुसार, यह तकनीक युद्धकला में क्रांति लाएगी।

इस बदलाव से अमेरिकी सेना की तैयारी और मजबूत होगी। आने वाले समय में यह नई पीढ़ी के रेडियो दुनिया भर में इस्तेमाल होंगे।
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