पेंटागन की रिपोर्ट: F-35 आधुनिकीकरण कार्यक्रम में बड़ी नाकामी
पेंटागन की नवीनतम परिचालन मूल्यांकन रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। F-35 लाइटनिंग II लड़ाकू विमान का आधुनिकीकरण कार्यक्रम अपने लक्ष्यों को पूरा करने में नाकाम रहा है। यह तकनीकी उन्नयन पैकेज टेक्नोलॉजी रिफ्रेश 3 (TR-3) पर आधारित था। इससे युद्ध क्षमताओं में बड़ा सुधार होना था। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि योजना के अनुसार परिणाम नहीं मिले। इससे अमेरिकी रक्षा विभाग को बड़ा झटका लगा है। एफ-35 दुनिया का सबसे महंगा लड़ाकू विमान प्रोग्राम है। इसकी लागत $1.7 ट्रिलियन से अधिक है।
F-35 लाइटनिंग II: टेक्नोलॉजी रिफ्रेश 3 पैकेज की विफलता
टेक्नोलॉजी रिफ्रेश 3 पैकेज को एफ-35 विमान के लिए बड़ा अपग्रेड माना जाता था। इससे विमान की कंप्यूटर प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ने वाली थी। हथियारों और सेंसर के बीच बेहतर तालमेल होना था। लेकिन पेंटागन की रिपोर्ट कहती है कि यह पूरी तरह असफल रहा। विमान की मौजूदा प्रणालियाँ उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रही हैं। इससे पायलटों और मिशनों पर सीधा असर पड़ सकता है। इस विफलता का एक कारण तकनीकी एकीकरण की कमी है। विकास चरण में देरी और अतिरिक्त लागत भी बड़ी समस्या बनी। कई विशेषज्ञों का मानना है कि TR-3 पैकेज को पूरा करने में 2-3 साल लग सकते हैं।
F-35 आधुनिकीकरण: युद्धक क्षमताओं पर प्रभाव
इस नाकामी का सीधा असर एफ-35 की युद्धक क्षमताओं पर पड़ा है। विमान को उन्नत मिशनों के लिए तैयार किया जा रहा था। लेकिन अब यह स्पष्ट है कि मौजूदा सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर संयोजन उम्मीदों से दूर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विमान के कुछ प्रमुख सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहे। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और नेविगेशन सिस्टम शामिल हैं। इस स्थिति में अमेरिकी वायुसेना को मौजूदा विमानों पर निर्भर रहना पड़ेगा। भारत जैसे देश भी एफ-35 को देख रहे हैं। लेकिन यह विफलता उनके फैसलों को प्रभावित कर सकती है। पेंटागन ने कहा है कि वह इस समस्या का समाधान ढूंढ रहा है।
F-35 कार्यक्रम: लागत और समय की बर्बादी
F-35 कार्यक्रम पहले ही अरबों डॉलर की लागत से जूझ रहा है। टेक्नोलॉजी रिफ्रेश 3 पैकेज का असफल होना एक और बड़ा झटका है। इससे अमेरिकी करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, विकास में देरी के कारण कुल लागत और बढ़ सकती है। इससे न केवल अमेरिका बल्कि अन्य सहयोगी देश प्रभावित होंगे। F-35 कार्यक्रम में 13 देश शामिल हैं। सभी को अपने बेड़े को अपडेट करने में मुश्किलें होंगी। पेंटागन ने माना है कि यह एक गंभीर चुनौती है। वे इसे हल करने के लिए नई रणनीति बना रहे हैं। इस रिपोर्ट ने जेन्स डिफेंस और डिफेंस न्यूज जैसे प्लेटफॉर्म पर चर्चा बढ़ा दी है।
F-35 का भविष्य: रणनीतिक पुनर्विचार
यह रिपोर्ट F-35 कार्यक्रम के भविष्य पर सवाल खड़ा करती है। अमेरिकी वायुसेना को अब मौजूदा विमानों के साथ काम करना होगा। TR-3 पैकेज को ठीक करने में और समय लगेगा। इस बीच, दुश्मनों के खिलाफ श्रेष्ठता बनाए रखना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर ध्यान देना चाहिए। भारत अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान (LCA) तेजस पर काम कर रहा है। यह एक सकारात्मक कदम है। लेकिन F-35 की नाकामी से पता चलता है कि बड़े कार्यक्रमों में सावधानी जरूरी है। पेंटागन को अब सख्त निगरानी और समयबद्ध सुधार की जरूरत है। इससे भविष्य में ऐसी गलतियों से बचा जा सकेगा।
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