जानें 2026 के 12 सबसे उन्नत देश

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डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत-चीन की बढ़त

चीन और भारत जैसे देशों में प्रौद्योगिकी उद्योग बहुत बड़े हैं। ये उद्योग पूर्ण रूप में विशाल हैं। लेकिन इस रैंकिंग में सिर्फ आकार को नहीं देखा गया। इसके बजाय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी गई। शोध की तीव्रता और प्रति व्यक्ति तकनीकी क्षमता भी महत्वपूर्ण थी।

प्रति व्यक्ति तकनीकी क्षमता पर जोर

यह रैंकिंग केवल बड़े पैमाने पर नहीं टिकी। इसमें प्रौद्योगिकी क्षमता को प्रति व्यक्ति आधार पर मापा गया। डिजिटल बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को भी शामिल किया गया। विश्व बैंक की डिजिटल विकास रिपोर्ट के अनुसार, यह मॉडल अधिक न्यायसंगत है। इससे छोटे देशों को भी बढ़त मिलती है।

शोध और नवाचार की भूमिका

शोध की तीव्रता इस रैंकिंग का एक प्रमुख मापदंड था। देशों में पेटेंट और वैज्ञानिक प्रकाशनों की संख्या देखी गई। वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत ने हाल ही में अच्छा प्रदर्शन किया है। चीन ने भी आरएंडडी में भारी निवेश किया है। लेकिन यहां प्रति व्यक्ति आधार पर मूल्यांकन हुआ।

भारत-चीन की तुलना में चुनौतियां

भारत की युवा आबादी तकनीकी क्षमता को बढ़ाती है। चीन का डिजिटल बुनियादी ढांचा अधिक मजबूत है। दोनों देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच की समस्या है। सरकारी योजनाएं डिजिटल विभाजन को कम करने में जुटी हैं।

भविष्य की दिशा और संभावनाएं

इस रैंकिंग का उद्देश्य नीति निर्माताओं को मार्गदर्शन देना है। इससे पता चलता है कि किस देश में प्रतिभा अधिक है। अगले दशक में भारत और चीन आगे बढ़ सकते हैं। डिजिटल शिक्षा और स्टार्टअप इस दिशा में मददगार होंगे।
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