देश के हवाई अड्डों की क्षमता 580 मिलियन पार
केंद्र सरकार ने सोमवार को बड़ी जानकारी दी है। देश के सभी हवाई अड्डों की वार्षिक यात्री क्षमता अब 580 मिलियन से अधिक हो गई है। यह जानकारी राज्यसभा में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने दी। उन्होंने बताया कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) समय-समय पर क्षमता विस्तार और आधुनिकीकरण परियोजनाएं चलाता है। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
यात्री क्षमता में जबरदस्त इजाफा
सरकार का यह आंकड़ा भारतीय विमानन क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। कुछ साल पहले यह क्षमता 400 मिलियन के आसपास थी। अब इसमें 45 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए की गई है। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर यात्री को सहज यात्रा अनुभव देना है। इसके लिए नए टर्मिनल और रनवे का निर्माण जोरों पर है।
AAI की प्रमुख परियोजनाएं और विस्तार
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण देशभर में कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें मौजूदा हवाई अड्डों का विस्तार और नए हवाई अड्डों का विकास शामिल है। छोटे शहरों को भी उड़ान सेवा से जोड़ा जा रहा है। क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के तहत कई नए मार्ग शुरू किए गए हैं। इससे छोटे शहरों के लोगों को बड़ी राहत मिली है। अधिकारियों के अनुसार, यात्री क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
विमानन क्षेत्र के लिए सरकार की प्राथमिकता
सरकार नागरिक उड्डयन क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है। हाल ही में कई हवाई अड्डों पर नए टर्मिनल खोले गए हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इसके अलावा, नोएडा में जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी जल्द चालू होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षमता विस्तार से देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कदम समय पर उठाया गया है।
भविष्य की तैयारी और बढ़ती मांग
आने वाले वर्षों में विमानन क्षेत्र में और तेजी की उम्मीद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू हवाई यातायात में सालाना 8-10 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से यात्रियों को कम समय में बेहतर सेवा मिलेगी। सरकार की योजना है कि अगले 5 वर्षों में और क्षमता बढ़ाई जाएगी। यह कदम देश को वैश्विक विमानन हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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