बोइंग ने बढ़ाई 737 उत्पादन दर, SPEEA हड़ताल से संकट
अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने अपने लोकप्रिय 737 मॉडल का उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी अब हर महीने 47 विमान बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह कदम बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस बीच SPEEA यानी सोसाइटी ऑफ प्रोफेशनल इंजीनियरिंग एम्प्लॉइज इन एयरोस्पेस की संभावित हड़ताल ने चिंताएं बढ़ा दी हैं।
SPEEA में हजारों इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं। ये कर्मचारी बोइंग के विमानों के डिजाइन, सर्टिफिकेशन और गुणवत्ता नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर ये हड़ताल पर चले जाते हैं, तो विमानों के उत्पादन और डिलीवरी पर सीधा असर पड़ेगा। बोइंग की मौजूदा स्थिति में यह झटका कंपनी के लिए बड़ा संकट बन सकता है। कंपनी पहले से ही सप्लाई चेन की समस्याओं और नियामकीय जांच का सामना कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि SPEEA की हड़ताल से इंजीनियरिंग सपोर्ट और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो सकती है। इसका सीधा असर उन एयरलाइंस पर पड़ेगा जो नए विमानों की प्रतीक्षा कर रही हैं। बोइंग ने हाल ही में अपने उत्पादन को सुव्यवस्थित करने के लिए कई कदम उठाए थे। लेकिन कर्मचारी संगठन की मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है। SPEEA ने वेतन वृद्धि और कार्य परिस्थितियों में सुधार की मांग की है।
बोइंग के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी कर्मचारियों के साथ बातचीत जारी रखे हुए है और वह एक सकारात्मक समाधान की उम्मीद करती है। लेकिन अगर बातचीत विफल रहती है, तो हड़ताल की स्थिति में कंपनी को अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि बोइंग के लिए यह समय बेहद नाजुक है। क्योंकि कंपनी अपने प्रतिद्वंद्वी एयरबस से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। बोइंग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
विमानन उद्योग के जानकारों के अनुसार, 737 मॉडल बोइंग की सबसे ज्यादा बिकने वाली सीरीज है। इसकी डिलीवरी में देरी से एयरलाइंस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। पहले से चल रहे ऑर्डर बैकलॉग को देखते हुए बोइंग ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया था। लेकिन अब हड़ताल की आशंका ने इस योजना पर पानी फेर दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बोइंग ने फिलहाल उत्पादन जारी रखा है, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब सभी की नजरें बोइंग और SPEEA के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।











