भारत के पर्यटन क्षेत्र में 2035 तक 1.1 करोड़ श्रमिकों की कमी
भारत का पर्यटन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इस बढ़त के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आ रही है। सितंबर 2026 की CBRE रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक लगभग 1.1 करोड़ श्रमिकों की कमी हो सकती है। यह कमी प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर के कारण है। पर्यटन उद्योग में यह श्रमिक संकट एक गंभीर मुद्दा बन सकता है।
होटल और नए पर्यटन क्षेत्रों में तेजी
देश में होटल और नए पर्यटन क्षेत्र तेजी से फैल रहे हैं। होटल व्यवसाय, होमस्टे, एडवेंचर टूरिज्म और इको-टूरिज्म में निवेश बढ़ा है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। लेकिन प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही। CBRE रिपोर्ट ने श्रमिकों की उपलब्धता को उद्योग की सबसे बड़ी बाधा बताया है। यह स्थिति होटलों की गुणवत्ता और सेवा पर असर डाल सकती है।
क्यों बढ़ रही है श्रमिकों की मांग
भारत में घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार भी पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। इससे होटल, रिसोर्ट, ट्रैवल कंपनियों और टूर ऑपरेटरों को कुशल स्टाफ की जरूरत है। लेकिन प्रशिक्षण संस्थान सीमित संख्या में पेशेवर तैयार कर रहे हैं। इसी अंतर के कारण 1.1 करोड़ श्रमिकों की भारी कमी का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्यटन उद्योग की वृद्धि को धीमा कर सकता है।
समाधान की जरूरत
इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर कौशल विकास कार्यक्रम चलाने चाहिए। होटल प्रबंधन, आतिथ्य सेवा और पर्यटन गाइड के लिए अधिक प्रशिक्षण केंद्र खोलने होंगे। ग्रामीण और छोटे शहरों में भी प्रशिक्षण की सुविधा बढ़ानी होगी। इससे रोजगार बढ़ेगा और पर्यटन क्षेत्र मजबूत होगा। समय पर कदम न उठाए गए तो 2035 तक स्थिति गंभीर हो सकती है।
अधिक जानकारी के लिए देखें: CBRE Research Report और Incredible India।
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