H-1B Visa News : ट्रंप के टारगेट पर H-1B वीजा होल्डर्स, जबरदस्ती एयरपोर्ट से महिला प्रोफेसर को किया डिपोर्ट!

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Trump targets H-1B visa holders, female professors forcibly deported from airport!

वाशिंगटन (ट्रैवल पोस्ट) H-1B Visa News : राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालने के बाद से ही अवैध अप्रवासियों, स्टूडेंट वीजा होल्डर्स, ग्रीन कार्ड होल्डर्स और वर्क वीजा पर काम करने वाले लोगों के खिलाफ एक्शन लेना शुरू किया है। अभी तक सिर्फ अवैध अप्रवासियों पर कार्रवाई हो रही थी, लेकिन अब इसके दायरे में H-1B वीजा होल्डर्स भी आ गए हैं। हाल ही में ब्राउन यूनिवर्सिटी के मेडिकल स्कूल में किडनी ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट और प्रोफेसर डॉ. रशा अलावीह को अमेरिका से डिपोर्ट कर दिया गया।

डॉ. रशा अलावीह के पास वैलिड H-1B वीजा था और एक फेडरल कोर्ट ने उनके डिपोर्टेशन पर अस्थायी रूप से रोक भी लगा दी थी, लेकिन बावजूद इसके उन्हें डिपोर्ट कर दिया। हर साल 65 हजार H-1B वीजा जारी किए जाते हैं।

यूनिवर्सिटी प्रोफेसर के साथ क्या हुआ?

डॉ. रशा अलावीह लेबनान की नागरिक हैं। उन्हें लेबनान में एक पारिवारिक यात्रा से लौटने के बाद बोस्टन लोगान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया। उन्हें 36 घंटे तक हिरासत में रखा गया और फिर पेरिस जाने वाली फ्लाइट में बैठा दिया गया। यहां गौर करने वाली बात ये है कि यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) को इस तरह की किसी भी कार्रवाई से पहले 48 घंटे का नोटिस देने का आदेश दिया गया था। CBP ने यह नहीं बताया कि अदालत के आदेश की अवहेलना क्यों की गई।

ब्राउन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और उनकी चचेरी बहन यारा चेहाब के वकीलों ने ट्रंप सरकार के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया है। इनमें गृह मंत्री क्रिस्टी नोएम और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शामिल हैं। डॉ. अलावीह से पहले कई छात्रों को भी डिपोर्ट किया गया है। इसमें भारतीय PhD स्टूडेंट रंजनी श्रीनिवासन भी शामिल हैं, जिनका स्टूडेंट वीजा रद्द कर दिया गया था।

इमिग्रेशन को लेकर सख्त हुए राष्ट्रपति ट्रंप

ट्रंप सरकार अवैध और कानूनी दोनों तरह के अप्रवासियों पर एक्शन ले रही है। ये पहले की नीतियों में हुए बदलाव का संकेत है, जो मुख्य रूप से सीमा प्रवर्तन पर केंद्रित थीं। अब रोजगार के लिए मिलने वाले वीजा, स्टूडेंट वीजा और अन्य कानूनी रास्तों से यूएस आने वाले लोगों की कड़ाई जांच की जा रही है। सरकार ने जोर देकर कहा है कि वीजा होना एक विशेषाधिकार है, लेकिन अधिकार नहीं। जिन व्यक्तियों को वीजा शर्तों का उल्लंघन करते हुए या अमेरिकी हितों के खिलाफ माने जाने वाली गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, उन्हें रद्द करने और डिपोर्ट होने का सामना करना पड़ सकता है।