नई दिल्ली (ट्रैवल पोस्ट) There is no seat number 13 in flights : जब आप फ्लाइट में सफर करते हैं, तो आमतौर पर सीधे अपनी सीट पर जाकर बैठ जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया कि कुछ विमानों में 13 नंबर की रो होती ही नहीं? सीटें सीधे 12 से 14 पर पहुंच जाती हैं। ये कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक प्रचलित अंधविश्वास और यात्रियों की मानसिकता को ध्यान में रखते हुए किया गया बदलाव है। जैसे कुछ इमारतों या होटलों में 13 नंबर का कमरा नहीं होता, वैसे ही कई एयरलाइंस भी 13 नंबर की सीट को पूरी तरह से छोड़ देती हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह।
There is no seat number 13 in flights :क्यों एयरलाइंस Row 13 छोड़ देती हैं?
13 नंबर से डर को “Triskaidekaphobia” कहते हैं। इस नंबर को लेकर डर काफी पुराना है और 1911 की एक अमेरिकन साइकोलॉजी जर्नल में इसका जिक्र भी किया गया था। कई लोगों का मानना है कि 13 अशुभ नंबर होता है, इसका कनेक्शन धर्म, कहानियों और परम्पराओं से रहता है। जैसे कुछ लोगों का मानना है “Last Supper” (ईसा मसीह का आखिरी खाना) में जूडस, जिसने ईसा को धोखा दिया था, वो 13वां मेहमान था।

कुछ लोग इसे नॉर्स माइथोलॉजी (पुरानी यूरोपीय कहानियों) से जोड़ते हैं। और एक वजह ये भी है कि 12 को कम्प्लीट यानी पूरे होने का प्रतीक माना जाता है (जैसे 12 महीने, 12 राशियां), इसलिए 13 को एक “बेकार” या “अशुभ” नंबर माना जाता है। इसी वजह से बहुत-सी एयरलाइंस row 13 छोड़ देती हैं, ताकि डर या अंधविश्वास वाले पैसेंजर्स को मानसिक तौर पर परेशानी ना हो। जब आप फ्लाइट बोर्ड करते हैं, तो सीट नंबर 12 से सीधे 14 पर चला जाता है।












