सुप्रीम कोर्ट ने बाघ संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय पर्यटन गतिविधियों को ecological protection के साथ संतुलित करने पर केंद्रित है। खास तौर पर संवेदनशील बाघ आवासों में सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू किया जाएगा। 80-पन्ने के फैसले को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. ग gadi और न्यायमूर्ति ए.जी. ने सुनाया है, जैसा कि फैसले में कहा गया है।
पर्यटन बनाम संरक्षण संतुलन की नई दिशा फैसले में वन्यजीव पर्यटन के तरीकों पर स्पष्ट मार्गदर्शक निर्देश दिए गए हैं।पारिस्थितिकी सुरक्षा को ध्वस्त किए बिना पर्यटन गतिविधियाँ चलने की गुंजाइश बनी रहेगी। संवेदनशील बाघ हैबिटैट में पर्यटकों की संख्या, समय और गतिविधियों पर नियंत्रण महत्वपूर्ण माना गया है। गाइडेड टूर, बर्डिंग और फोटोग्राफी के मानक भी परियोजना के भीतर निर्धारित किए जाएंगे। कार्यान्वयन के दायरे और प्रभावित क्षेत्र निर्णय कहता है कि संरक्षण पहलों को पर्यटन नीतियों के साथ जोड़ा जाएगा। रेंज क्षेत्रों में पर्यटकों की अनुमति के मानक निर्धारित होंगे, ताकि बाघों पर disturbance कम हो। स्थानीय समुदायों को संरक्षण योजनाओं में भागीदारी और लाभ के अवसर मिलेंगे। लागू करने के लिए केंद्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर नियंत्रण तंत्र मजबूत होगा। जानकारी के स्रोत और आगे की राह विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक स्रोत देखें, जैसे Supreme Court of India और NTCA साइट्स। Wildlife conservation और टूरिज्म नीति पर आगे के अपडेट के लिए WWF इंडिया से भी जुड़ें।
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