नई दिल्ली में भारत-तुर्की साहित्यिक शाम
14 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में विश्व पुस्तक मेला परिसर के बाहर एक खास साहित्यिक शाम आयोजित हुई। यह आयोजन भारत और Türkiye के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की परंपरा को मजबूत करने के उद्देश्य से था। कार्यक्रम का मुख्य आयोजन H.E. Ali Murat Ersoy, Türkiye गणराज्य के राजदूत, की निवास-स्थली पर हुआ। शाम में भारतीय और Türkiye की नामी हस्तियां, लेखक, पाठक और साहित्य प्रेमी शामिल हुए। यह अवसर भाषा, अनुवाद और समकालीन रचना के क्षेत्र में सहयोग की नई दिशा दिखाने लगा। आयोजन के उद्घाटन समारोह में स्थानीय साहित्य प्रेमी और विद्यार्थी भी मौजूद थे। शाम के दौरान मंच से दोनों देशों की मौजूदा साहित्यानुभवों का परिचय कराया गया। पाठक प्रसन्न थे और उन्होंने दोनों भाषाओं में लेखन को बढ़ावा देने की मांग उठाई। अधिकारियों ने सहयोग की गति बनाए रखने पर सहमति जताई। इस तरह के प्रयास से साहित्यिक नेटवर्क मजबूत हो रहे हैं। आयँ उभरते लेखकों के लिए योजना भी बनाई गई जो द्वि-भाषी प्रकाशनों के लिए मार्ग प्रशस्त करे।
संस्कृति की साझा धारा और अनुवाद के अवसर
आयोजन के दौरान कई संस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ साहित्यिक अंतर्संवाद की विविधता दिखी। दोनों पक्षों के लेखकों ने अपने देश की कहानियाँ और कविता पाठ के रूप में प्रस्तुत कीं। अनुवादित पाठों के जरिए पाठक दो भाषाओं के भाव और संस्कृति से सीधे संबद्ध हुए। संवाद और प्रश्नोत्तर सत्रों ने साहित्यिक अनुवाद के अवसरों पर गहराई से चर्चा की। इस सहयोग से नई किताबों के सह-लेखन और द्वि-भाषी प्रकाशनों की संभावनाएं उभरकर सामने आईं। स्थानीय प्रकाशन संस्थान और अकादमी ने युवा प्रतिभाओं के लिए मंच बनाए, प्रकाशन-योजना पर विचार किए। सामुदायिक पठन-सहभागिता से पाठकों के बीच पुस्तक-प्रेम की रफ्तार बढ़ी। समापन के वक्त कलाकारों ने एक दूसरे के देश की परंपरा का सांस्कृतिक गीत भी प्रस्तुत किया। बच्चों और शिक्षकों के लिए दीर्घा-परियोजनाएं भी प्रस्तावित हुईं ताकि युवाओं को साहित्य से जोड़ा जा सके। शाम के अंत में उनकी मेहमानदारी की प्रशंसा हुई। बच्चों-युवाओं के लिए पुस्तक-वस्तु पर काम करने की प्रेरणा भी बढ़ी।
राजदूत के विचार और भविष्य की योजना
राजदूत Ersoy ने कहा कि दोनों साहित्यिक परंपराएं एक दूसरे की समझ और सम्मान को मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि सरकारें और संस्कृति संस्थान अनुवाद, प्रकाशन और शिक्षा में सहयोग बढ़ाएंगी। दोनों देशों के लेखक मिलकर द्वि-भाषी पुस्तकें बनाने पर विचार कर रहे हैं। छोटे-छोटे मंचों पर युवा लेखक नवाचारी कहानियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। यह प्रकार के कार्यक्रम सामाजिक मीडिया पर भी उत्साह बढ़ा रहे हैं। राजदूत Ersoy ने सहयोग की सुदृढ़ता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। पत्रकारिता के क्षेत्र से भी कई प्रतिभागी उपस्थित थे, जिन्होंने दिशानिर्देशों पर चुटीली टिप्पणियाँ दीं। इस कार्यक्रम की सफलता से भविष्य में भारत–Türkiye सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने की उम्मीद जोर पकड़ेगी। कूटनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी यह प्रयास बहु-पक्षीय सकारात्मक संदेश देता है। अश्वेत-कालापात्रता की सीमाओं को तोड़कर साहित्यिक आदान-प्रदान को सरल बनाने की दिशा में एक नया प्रयास माना गया है।
आगे की राह: डिजिटल और द्वि-भाषी प्रकाशन
आगामी महीनों में भारत और Türkiye मिलकर डिजिटल श्रृंखला, लाइव पाठ और किताब-प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। युवा पाठकों के लिए अनुवाद-आधारित कार्यक्रम और बहुभाषी प्रकाशन योजना पर काम होगा। इन पहलों से भारत Türkiye साहित्य के नए पाठक जुड़ेंगे और सांस्कृतिक व्यापार को भी सुदृढ़ करेगी। इन घटनाओं से द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत होंगे और साहित्यिक आवाजें वैश्विक मंच तक पहुंचेंगी। समाप्ति पर, यह शाम दोनों देशों के बीच चल रही साझेदारी की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी। सार्वजनिक अंशदान और निजी साझेदारी के लिए कई संयुक्त कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा, इस पहल से चल रहे आदान-प्रदान में और भी कई नवाचार दस्तक देंगे। अधिक जानकारी के लिए देखें New Delhi World Book Fair और Türkiye Embassy in India.











