एयरबस का दो-लड़ाकू विमान मॉडल
फ्रांस और जर्मनी के बीच भविष्य के कॉम्बैट एयर सिस्टम (एफसीएएस) पर मतभेद गहरा रहे हैं। यूरोपीय रक्षा परियोजना ऑपरेशनल आवश्यकताओं और प्रबंधन को लेकर अटकी हुई है। एयरबस ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है।
संयुक्त परियोजना में चुनौतियाँ
एफसीएएस यूरोप की सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजनाओं में से एक है। फ्रांस और जर्मनी इसके मुख्य भागीदार हैं। दोनों देशों की परिचालन आवश्यकताओं में बड़ा अंतर है। प्रोग्राम गवर्नेंस को लेकर भी मतभेद बने हुए हैं। इससे परियोजना की प्रगति रुक गई है।
दो-लड़ाकू संरचना का प्रस्ताव
एयरबस ने दो-लड़ाकू विमान संरचना का समर्थन किया है। यह मॉडल दोनों देशों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा कर सकता है। इससे तकनीकी साझाकारी बनी रहेगी। साथ ही प्रत्येक देश अपनी रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुसार काम कर सकेगा। यह समझौता यूरोपीय रक्षा सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है।
भविष्य की राह
इस प्रस्ताव से परियोजना को नई गति मिल सकती है। यूरोपीय रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। दोनों देशों को राजनीतिक स्तर पर समझौता करना होगा। तकनीकी और वित्तीय चुनौतियों का समाधान निकालना होगा।
यूरोपीय रक्षा सहयोग के बारे में अधिक जानकारी यूरोपीय रक्षा एजेंसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। वैश्विक रक्षा परियोजनाओं की जानकारी जेन्स डिफेंस पर भी मिल सकती है।
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