बोइंग के लिए चीन से बड़ा ऑर्डर मिलना मुश्किल
अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग के लिए चीन से नया बड़ा ऑर्डर मिलना मुश्किल होता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक से पहले यह स्थिति सामने आई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच तनाव के चलते यह सौदा टल सकता है। चीन पिछले कुछ समय से बोइंग से दूरी बनाए हुए है।
व्यापार तनाव बना बड़ा कारण
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध लंबे समय से जारी है। इसका असर विमानन क्षेत्र पर भी साफ दिख रहा है। चीन ने पहले ही बोइंग विमानों की खरीद पर रोक लगा रखी है। इसके चलते कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्रंप-शी बैठक से सौदे की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन अब यह उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है। यह मामला वैश्विक व्यापार के लिए भी अहम माना जा रहा है।
चीन कर रहा घरेलू विमानों को बढ़ावा
चीन अपनी घरेलू विमान निर्माता कंपनी कोमैक के विमानों को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। कंपनी C919 विमान बना रही है। यह विमान बोइंग और एयरबस की सीधी प्रतिस्पर्धा में है। चीन का लक्ष्य विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटाना है। इससे बोइंग के लिए चीनी बाजार में मुकाबला और कठिन हो गया है। कई एशियाई देश भी अब नए विकल्प तलाश रहे हैं।
बोइंग के शेयरों पर दबाव
इस खबर के बाद बोइंग के शेयरों पर दबाव देखा गया। निवेशकों को कंपनी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। बोइंग पहले ही सुरक्षा मुद्दों और उत्पादन समस्याओं से जूझ रही है। चीन का बड़ा ऑर्डर मिलना कंपनी के लिए राहत की बात होती। लेकिन मौजूदा हालात में यह सौदा फंसता दिख रहा है। जानकारों के मुताबिक, आने वाले महीनों में स्थिति साफ हो सकती है।
आगे क्या होगा?
दोनों नेताओं की बैठक में व्यापार मुद्दों पर चर्चा होगी। अगर समझौता नहीं हुआ तो बोइंग को बड़ा झटका लग सकता है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा विमानन बाजार माना जाता है। यहां से ऑर्डर मिलना हर कंपनी के लिए अहम है। फिलहाल बोइंग की नजरें इस बैठक के नतीजों पर टिकी हैं। देखना होगा कि ट्रंप और शी की मुलाकात क्या रुख तय करती है।
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए देखें: रॉयटर्स की रिपोर्ट और बोइंग की आधिकारिक वेबसाइट।











