कॉकपिट में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के नियम
उड़ान के दौरान पायलटों के लिए भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल के सख्त नियम हैं। यात्री अक्सर कॉकपिट में टैबलेट देख सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पायलट कुछ भी इस्तेमाल कर सकते हैं। नागरिक उड्डयन नियमों के तहत हर डिवाइस की जांच होती है। इन नियमों का पालन सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
निजी उपकरणों पर सख्त पाबंदियां
पायलट निजी फोन या टैबलेट का इस्तेमाल उड़ान के दौरान नहीं कर सकते। कॉकपिट में दिखने वाले टैबलेट आमतौर पर एयरलाइन के होते हैं। इन्हें इलेक्ट्रॉनिक फ्लाइट बैग कहा जाता है। इनमें उड़ान से जुड़े जरूरी दस्तावेज और चार्ट होते हैं। ये डिवाइस विमान के सिस्टम से जुड़े होते हैं। इनका इस्तेमाल केवल काम के लिए किया जाता है।
सुरक्षा क्यों है सबसे अहम
किसी भी उपकरण से विमान के सिस्टम में गड़बड़ी हो सकती है। इसलिए पायलटों को सख्त निर्देश दिए जाते हैं। उड़ान भरने से पहले और उतरने के दौरान ध्यान बंटना खतरनाक हो सकता है। क्रू को केवल जरूरी काम के लिए डिवाइस छूने की इजाजत है। नियम तोड़ने पर कार्रवाई भी हो सकती है। यह सब यात्रियों की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
यात्रियों के लिए भी नियम
यात्रियों को भी उड़ान के दौरान फोन को फ्लाइट मोड पर रखना होता है। कुछ एयरलाइंस वाई-फाई की सुविधा देती हैं। लेकिन यह पायलट के नियंत्रण वाले सिस्टम से अलग होता है। पायलट और यात्री दोनों के नियम अलग-अलग हैं। इसलिए कॉकपिट में टैबलेट देखकर भ्रम में न पड़ें।
नियमों का पालन जरूरी
उड़ान सुरक्षा के लिए हर नियम का पालन जरूरी है। पायलटों की ट्रेनिंग में इन नियमों की जानकारी दी जाती है। नियमित ऑडिट से भी इनकी जांच होती है। इससे उड़ान के दौरान कोई खतरा नहीं होता। यही कारण है कि विमानन क्षेत्र दुनिया में सबसे सुरक्षित माना जाता है। एफएए और आईसीएओ जैसी संस्थाएं इन नियमों को तय करती हैं।
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