Canada News : क्या कनाडा में नौकरी या पढ़ाई करना मुश्किल होगा? जानिए कैसी होगी इमिग्रेशन पॉलिसी

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Will it be difficult to get a job or study in Canada? Know what the immigration policy will be like

कनाडा (ट्रैवल पोस्ट)  Canada News : कनाडा को अगला प्रधानमंत्री मिल चुका है। जस्टिन ट्रूडो की जगह सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी के नेता के तौर पर मार्क कार्नी को चुना गया है और वह देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। 59 वर्षीय कार्नी कनाडा की कमान ऐसे समय में संभाल रहे हैं, जब देश तीन मोर्चों पर परेशानियां झेल रहा है। एक तरफ अमेरिका के साथ टेंशन और ट्रेड वॉर चल रही है, तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ रखी है। कनाडा में अप्रवासियों की बढ़ती संख्या भी एक चुनौती है।

अर्थशास्त्री और बैंकर रह चुके कार्नी जल्द ही शपथ लेंगे। कार्नी का जन्म कनाडा के नॉर्थवेस्ट टेरिटरी में हुआ और वह अल्बर्टा में पले-बढ़े हैं। उन्होंने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। वह बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर भी रह चुके हैं। वहीं, कार्नी के पीएम चुने जाने के बाद भारतीय वर्कर्स और छात्रों के मन में सवाल उठ रहा है कि उनके कार्यकाल में इमिग्रेशन को लेकर किस तरह के बदलाव दिखेगा। आइए इस बारे में जानते हैं।

हमने कनाडा में आने वाले लोगों को निराश किया: मार्क कार्नी

मार्क कार्नी जस्टिन ट्रूडो की सरकार के इमिग्रेशन प्लान के आलोचक रहे हैं। पिछले साल नवंबर में उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा था, “मुझे लगता है कि पिछले कुछ सालों में हम इमिग्रेशन को लेकर अपने मूल्यों पर खरे नहीं उतरे हैं। हमारे यहां बड़ी संख्या में विदेशी वर्कर्स, स्टूडेंस और नए कनाडाई लोग आए, जिन्हें हम बसा नहीं सके। हमारे पास उनके लिए ना आवास है, ना हेल्थकेयर है और ना अवसर। साफ तौर पर हमने उन लोगों को निराश किया है, जिन्हें हमने अपने यहां आने दिया है।”

इमिग्रेशन को लेकर मार्क कार्नी का क्या रुख है?

पिछले महीने के अंत में मार्क कार्नी ने कहा था कि वह विदेशियों की संख्या को सीमित करेंगे। उन्होंने एक डॉक्यूमेंट जारी किया था, जिसमें उनकी इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर जानकारी दी गई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि कनाडा ने अपने यहां आवास, हेल्थकेयर और सोशल सर्विस की क्षमता से ज्यादा लोगों को आने दिया है। उन्होंने एक संरचित, आर्थिक रूप से बेहतर इमिग्रेशन पॉलिसी की वकालत की। आइए डॉक्यूमेंट में बताए गए इमिग्रेशन पॉलिसी को समझते हैं।

मार्क कार्नी का कहना है कि हर राज्य में उतने ही छात्रों को पढ़ने के लिए स्टडी परमिट मिले, जितना वो राज्य उन्हें आवास और रोजगार देने में सक्षम है। आसान भाषा में कहें तो राज्य की रोजगार और आवास देने की क्षमता के आधार पर ही वहां विदेशी छात्रों को पढ़ने की इजाजत दी जाए। नए पीएम के मुताबिक, टेंपरेरी फॉरेन वर्कर्स यानी अस्थायी विदेशी वर्कर्स को वीजा तभी दिया जाएगा, जब किसी खास इंडस्ट्री में लोगों की कमी है। उनका कहना है कि हेल्थकेयर और क्लीन एनर्जी इंडस्ट्री में लोगों की कमी है, इसलिए फिलहाल इस सेक्टर में ही काम करने के लिए विदेशी वर्कर्स को वीजा मिले।

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मार्क कार्नी ने डॉक्यूमेंट में कहा कि कंपनियों को भी दायित्वों को पूरा करना चाहिए। उनका कहना है कि अगर कोई कंपनी विदेशी वर्कर को अपने यहां नौकरी दे रही है, तो उसे वर्कर को घर और लैंग्वेज ट्रेनिंग प्रोग्राम भी देना होगा। वह पहले विदेशी वर्कर्स की संख्या कम करने की वकालत कर चुके हैं।