नई दिल्ली (ट्रैवल पोस्ट) DGCA FDTL Rules : अगर आप पिछले कुछ दिनों से एयरपोर्ट पर फ्लाइट के डिले या कैंसिल होने का ऐलान सुनकर परेशान हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। नवंबर की शुरुआत से ही देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद में फ्लाइटों का शेड्यूल बुरी तरह अस्त-व्यस्त चल रहा है। इस व्यवस्था के पीछे नवंबर से लागू हुए डीजीसीए (DGCA) के नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) नियमों को माना जा रहा है, जिसके चलते कई उड़ानें देरी से संचालित हो रही हैं या आखिरी वक्त पर रद्द हो रही हैं।
डीजीसीए ने पायलटों की थकान कम करने और उड़ान सुरक्षा बेहतर बनाने के मकसद से जनवरी 2024 में ये नए नियम जारी किए थे। हालांकि, एयरलाइंस की तैयारी पूरी न होने के कारण इन्हें पहले 1 जून के बजाय 1 नवंबर से लागू किया गया। नियम लागू होते ही एयरलाइंस के रोस्टर गड़बड़ा गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि 1 से 3 नवंबर के बीच देश की सभी बड़ी एयरलाइंस का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) तेजी से गिरा है। इंडिगो का ओटीपी 68.4%, एयर इंडिया का 64.5%, अकासा का 58.3%, एलायंस एयर का 53.9% और स्पाइसजेट का महज 43.6% रहा।
DGCA FDTL Rules : एविएशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, समस्या सिर्फ नियमों की नहीं, बल्कि एयरलाइंस द्वारा रोस्टर प्लानिंग ठीक से न करना भी है। नए ड्यूटी आवर लिमिट के कारण पायलटों के पास उड़ान भरने का समय सीमित हो गया है और रिजर्व क्रू की कमी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने बताया कि कई एयरलाइंस को उम्मीद थी कि डीजीसीए डेडलाइन एक बार फिर बढ़ा देगा, इसलिए उन्होंने पूरी तैयारी नहीं की।
एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि एयरलाइंस द्वारा ये देरी और रद्द होने वाली उड़ानें रेगुलेटर पर दबाव बनाने की एक कोशिश लग रही हैं, जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। उनके अनुसार, ये गड़बड़ी गर्मी से सर्दी के शेड्यूल बदलने के कारण नहीं, बल्कि पायलटों के काम के घंटे और आराम से जुड़े नए नियमों के कारण है, जिनके मुताबिक एयरलाइंस ने स्टाफ और शेड्यूल तैयार नहीं किया।












