जानिए हैवलॉक ब्रिज का ₹47 करोड़ पर्यटन प्लान पुष्करम 2027 के लिए!

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हैवलॉक ब्रिज का भव्य कायाकल्प: आंध्र सरकार ने स्वीकृत की 47 करोड़ की परियोजना

आंध्र प्रदेश का ऐतिहासिक हैवलॉक ब्रिज अब एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनेगा। राज्य सरकार ने इस पुल के पुनर्विकास के लिए 47 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। यह परियोजना 2027 में होने वाले गोदावरी पुष्करम से पहले पूरी होगी। इस पहल को अखंड गोदावरी परियोजना का हिस्सा बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सदियों पुराने इस पुल को संरक्षित करना है।

पुल का ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान स्थिति

यह पुल 1897 में ब्रिटिश काल में बनाया गया था। यह गोदावरी नदी पर स्थित है। पुल की लंबाई लगभग 3.5 किलोमीटर है। यह पुल 1997 तक रेल यातायात के लिए उपयोग में था। अब यह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। सरकार इसे एक आकर्षक पर्यटन स्थल में बदलना चाहती है। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटक यहां गोदावरी नदी के दृश्य का आनंद ले सकेंगे। हैवलॉक ब्रिज का इतिहास देखने के लिए यहां क्लिक करें।

परियोजना के मुख्य आकर्षण और विकास योजना

परियोजना में पुल पर ग्लास वॉकवे बनाया जाएगा। यहां पर्यटकों के लिए झूला पुल और साइकिल ट्रैक भी होंगे। रात में पुल को रोशन करने के लिए लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। नदी किनारे पिकनिक स्पॉट और कैफेटेरिया भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा, यहां वाटर स्पोर्ट्स की सुविधाएं भी होंगी। सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। आंध्र प्रदेश पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह एक अहम कदम है।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस परियोजना से गोदावरी क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह पुल राजामुंदरी शहर से जुड़ा है। यहां हर साल हजारों पर्यटक आते हैं। पुष्करम के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सरकार का लक्ष्य है कि यह पुल एक प्रमुख सेल्फी पॉइंट बने। इससे सोशल मीडिया पर भी शहर का प्रचार होगा। स्थानीय व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। होटल, रेस्तरां और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।

समय सीमा और भविष्य की योजनाएं

परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा। इस दौरान पुल की संरचनात्मक सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पुराने पुल को नुकसान पहुंचाए बिना ही नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। इसके अलावा, नदी किनारे अन्य पर्यटन परियोजनाओं की भी योजना है। यह आंध्र प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक पहल साबित होगी।

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