अब देखिए हॉर्नबिल सफारी उदंती-सीतानाडी में

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छत्तीसगढ़ में हॉर्नबिल सफारी की शुरुआत

छत्तीसगढ़ वन विभाग जल्द ही उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में एक समर्पित हॉर्नबिल सफारी शुरू करने जा रहा है। यह कदम वन्यजीव संरक्षण, सामुदायिक इको-टूरिज्म और स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए स्थायी आजीविका की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी। यह सफारी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के गांवों ओध, अमलोर और अमामोरा में शुरू की जाएगी। यहां पिछले कुछ वर्षों से हॉर्नबिल की प्रजातियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

हॉर्नबिल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी

इस सफारी का मुख्य उद्देश्य हॉर्नबिल पक्षियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। इस प्रजाति को अक्सर “वन के किसान” के रूप में जाना जाता है। यह पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। स्थानीय आदिवासी समुदायों को इको-टूरिज्म गाइड और संरक्षणकर्ता के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण में उनकी भूमिका मजबूत होगी। इस पहल से पर्यटकों को हॉर्नबिल की अनोखी प्रजातियों को देखने का मौका मिलेगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

यह सफारी स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। ओध, अमलोर और अमामोरा गांवों के लोग इससे सीधे लाभान्वित होंगे। वे पर्यटकों के लिए होमस्टे और स्थानीय उत्पादों की बिक्री कर सकेंगे। इससे गरीबी कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा। यह एक सतत विकास मॉडल होगा, जो प्रकृति और मानव दोनों को लाभ पहुंचाएगा।

इको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण

हॉर्नबिल सफारी इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को जोड़ता है। वन विभाग ने इसके लिए विशेष मार्ग तैयार किए हैं। पर्यटकों को हॉर्नबिल की विभिन्न प्रजातियों को देखने का मौका मिलेगा। यह सफारी उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की जैव विविधता को उजागर करेगी। हॉर्नबिल संरक्षण और उसके महत्व के बारे में और अधिक जानें

भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां

वन विभाग इस सफारी को धीरे-धीरे विस्तारित करने की योजना बना रहा है। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। इसमें स्थानीय समुदायों का प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। इसके लिए सरकार और गैर सरकारी संगठनों का सहयोग आवश्यक होगा। यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव पर्यटन के लिए एक प्रमुख गंतव्य बना सकती है। छत्तीसगढ़ में इको-टूरिज्म के अन्य पहलुओं के बारे में पढ़ें। इससे राज्य में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिलेगा।