केरल में पर्यटन को मिलेगी नई दिशा: सतत विकास पर जोर
केरल सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक नई नीति की घोषणा की है। यह नीति सतत और अनुभव-केंद्रित विकास पर आधारित है। विधानसभा में राजेंद्र अर्लेकर ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण राज्य को भारत का सबसे भावनात्मक रूप से जुड़ने वाला पर्यटन स्थल बनाएगा। पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य
यह नीति जिम्मेदार यात्रा को प्रोत्साहित करती है। राज्य पर्यटन वृद्धि को पर्यावरणीय संतुलन के साथ जोड़ेगा। केरल पर्यटन वेबसाइट के अनुसार यह संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सरकार का मानना है कि पर्यटन से स्थानीय समुदायों को लाभ होना चाहिए। इससे स्थायी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता
नीति का मुख्य फोकस भावनात्मक जुड़ाव पर है। पर्यटकों को केरल की संस्कृति और प्रकृति से गहराई से जुड़ने का मौका मिलेगा। इसके लिए खास कार्यक्रम बनाए जाएंगे। जिम्मेदार पर्यटन योजना के तहत इसे लागू किया जाएगा। इससे पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा।
पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण
सरकार पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देगी। पर्यटन गतिविधियों से प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान नहीं होगा। स्थानीय लोगों की भलाई के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी। इससे पर्यटन क्षेत्र का संतुलित विकास होगा।
निवेश और रोजगार के अवसर
इस नीति से निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। पर्यटन क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। छोटे उद्यमियों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह केरल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
सतत पर्यटन की ओर कदम
केरल सरकार का यह कदम देश में एक मिसाल बनेगा। पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना चुनौतीपूर्ण है। लेकिन यह नीति इस चुनौती से निपटने में मदद करेगी। राज्य का लक्ष्य 2025 तक पर्यटन में 10% वृद्धि करना है।
Related: टाज वायनाड को प्लेटिनम ग्रीन अवार्ड











