खबर का सार
12 दिसंबर को महालेखा परीक्षक के कार्यालय ने एक ऑडिट प्रकाशित किया। ऑडिट के निष्कर्ष सीधे रक्षा विभाग के कदमों पर सवाल उठाते हैं। यह निष्कर्ष 2024 अनुबंध के अंतर्गत F-35 के रखरखाव प्रदर्शन से जुड़ा है। रक्षा विभाग Lockheed Martin को बार-बार जवाबदेह ठहराने में बैर नहीं कर पाया। F-35 कार्यक्रम की व्यापकता के बावजूद रखरखाव में गुणवत्ता और समयसीमा मायने रखती है। ऑडिट सार्वजनिक निकट भविष्य में सुधारों की जरूरत पर जोर देता है। ये सुधार निगरानी तंत्र, मापदंड और धारित दायित्वों को स्पष्ट करते हैं। यह रिपोर्ट राष्ट्रपति प्रशासन और कांग्रेस के लिए संकेतक बन सकती है। छोटे-छोटे कदम भी रक्षा-खर्च और आपूर्ति-श्रृंखला पर बड़े प्रभाव डालते हैं। इस खबर से नीति-निर्माताओं के लिए तत्काल निर्णय जरूरी दिखते हैं।
मुख्य निष्कर्ष
ऑडिट में प्रदर्शन मापदंडों के साथ निगरानी में कमजोरियाँ पाई गईं। कथित तौर पर अनुबंध के दायित्व स्पष्ट नहीं थे, जिससे सुधार में देरी हो सकती है। फ्यूचर पेनाल्टी और बोनस संरचनाओं का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। यह बताता है कि निगरानी-तंत्र भरपूर मजबूती से नहीं संचालित हो रहा था। रक्षा विभाग के उच्च अधिकारी अभी तक ठोस कदम उठाने से चूक रहे। ऑडिट दर्शाता है कि कार्यक्रम-स्थिरता के लिए परिशिष्ट निगरानी चाहिए थी। फायदे-नुकसान के आकलन में सुरक्षा और असमानता का खतरा बना रहा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सिस्टम-ऑडिट से सुधार संभव है। इससे नीति-निर्माताओं को अनुबंधों की शर्तों का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। आर्थिक दृष्टि से भी यह बदलाव रक्षा बजट के पूर्वानुमान को प्रभावित कर सकता है। सम्पूर्ण कार्यक्रम के लिए कड़े आंकड़े और समय-सीमा जरूरी हैं। नीतिगत निर्णयों में पारदर्शिता बढ़ाने से विश्वास बहाल होगा।
संभावित प्रभाव और नीति सुझाव
नतीजे रक्षा आपूर्ति श्रृंखला की जवाबदेही पर फिर से सवाल उठाते हैं। विश्लेषकों के मुताबिक सुधार के लिए नए मापदंड और पेनाल्टी संरचना जरूरी हैं। ठेकेदार के दायित्व स्पष्ट और प्रदर्शन-आधारित बोनस-penalties भी प्रभावी होंगे। निगराणी तंत्र की मज़बूती से कार्यक्रम-स्थिरता सुनिश्चित होगी। यह कदम रक्षा खर्च पर स्थिरता और नीति-निर्णयों पर असर डालेंगे। समय पर कार्रवाई से आपूर्ति और मुस्तैदी बढ़ेगी। इससे लागत-आधिकारिक आकलन भी पारदर्शी होगा और भ्रष्टाचार जैसी आशंकाओं में कमी आयेगी। आपूर्ति-श्रृंखला की जवाबदेही बढ़ने से उद्योग का भरोसा मजबूत होगा। सरकार की निर्णय-प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता आएगी।
आगे की राह और स्रोत
घटना से कांग्रेस में जवाबदेही के लिए सवाल उठे हैं और सुनवाई की उम्मीद है। विधायिका चाहती है कि रक्षा अनुबंध अधिक स्पष्ट दायित्व और निगरानी के साथ हों। महालेखा परीक्षक ने स्पष्ट सिफारिशें दी हैं ताकि भविष्य की कमियाँ न दोहराई जाएँ। अधिक जानकारी के लिए देखें DoD Inspector General पेज और Lockheed Martin के आधिकारिक F-35 विवरण पन्ने।












