पेंटागन ने ईरान संघर्ष का अनुमानित खर्च 37.5 अरब डॉलर किया
अमेरिकी रक्षा विभाग, पेंटागन ने ईरान संघर्ष की लागत का अनुमान 37.5 अरब डॉलर तक बढ़ा दिया है। यह जानकारी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दी। उन्होंने कांग्रेस के सदस्यों को चेतावनी दी कि अगर अतिरिक्त फंड जल्दी मंजूर नहीं हुआ तो सैन्य प्रशिक्षण में कटौती हो सकती है। यह लागत पिछले अनुमानों से कहीं अधिक है। इससे अमेरिकी सुरक्षा बजट पर दबाव बढ़ गया है।
रक्षा सचिव हेगसेथ की चेतावनी
पीट हेगसेथ ने सीनेटरों को बताया कि यह खर्च तत्काल जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस फंड के बिना सेना की तैयारी कमजोर होगी। सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। इससे अमेरिकी सेना की क्षमता प्रभावित होगी। हेगसेथ ने कहा कि कांग्रेस को तुरंत पूरक वित्तपोषण मंजूर करना चाहिए। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। अधिक जानकारी के लिए पेंटागन की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
ईरान संघर्ष का बढ़ता खर्च
पेंटागन ने पहले इस संघर्ष की लागत 30 अरब डॉलर अनुमानित की थी। अब यह बढ़कर 37.5 अरब डॉलर हो गया है। इस बढ़ोतरी का कारण हथियारों की आपूर्ति और सैनिकों की अतिरिक्त तैनाती बताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खर्च और बढ़ सकता है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। रक्षा विशेषज्ञ इसे अनियोजित खर्च बता रहे हैं। आप कांग्रेस की बजट रिपोर्ट यहां पढ़ सकते हैं।
कांग्रेस के सामने चुनौती
अमेरिकी कांग्रेस के सामने अब बजट मंजूरी की बड़ी चुनौती है। सीनेट और हाउस के सदस्यों के बीच इस पर मतभेद हैं। कुछ सांसद इसे अनावश्यक खर्च मानते हैं। वहीं, अन्य इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं। पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि देरी से सेना की तैयारी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि फंडिंग में देरी से देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इस मुद्दे पर अगले सप्ताह सुनवाई होने वाली है।
सैन्य प्रशिक्षण पर संभावित असर
रक्षा सचिव ने चेतावनी दी कि फंड की कमी से सैन्य प्रशिक्षण में कटौती होगी। इससे सेना के युद्ध कौशल प्रभावित होंगे। युवा सैनिकों को नए हथियारों का प्रशिक्षण नहीं मिल पाएगा। विशेषज्ञ इसे सेना की मनोबल के लिए खतरा मानते हैं। पेंटागन ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम अस्थायी रूप से रोके जाएंगे। इससे दीर्घकाल में अमेरिकी सुरक्षा कमजोर हो सकती है। कांग्रेस से जल्द निर्णय की उम्मीद है। यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए गंभीर संकेत है।
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