BRICS देशों की डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का RBI का प्रस्ताव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव BRICS देशों की आधिकारिक डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने का है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार और पर्यटन के लिए क्रॉस-बॉर्डर भुगतान को सरल बनाना है। यह जानकारी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट उन अधिकारियों के हवाले से है जो इस मामले से परिचित हैं।
अंतरराष्ट्रीय भुगतान दक्षता पर भारत का बढ़ता फोकस
यह प्रस्ताव भारत के बढ़ते फोकस को दर्शाता है। भारत डिजिटल नवाचार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय भुगतान दक्षता में सुधार चाहता है। साथ ही, इसमें आने वाले अवरोधों को कम करना भी लक्ष्य है। इस पहल से वैश्विक लेनदेन की गति बढ़ सकती है। लागत में कमी आने की भी उम्मीद है। यह कदम RBI की डिजिटल प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है।
डिजिटल मुद्रा एकीकरण के संभावित लाभ
BRICS डिजिटल मुद्राओं के एकीकरण से कई फायदे होंगे। यह विदेशी मुद्रा जोखिम को कम करेगा। लेनदेन का समय घटेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। व्यापारिक सौदों की सुविधा के लिए यह एक मजबूत आधार तैयार करेगा। पर्यटकों को भी त्वरित और सुरक्षित भुगतान विकल्प मिलेंगे। यह वैश्विक वित्तीय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
भविष्य की राह और चुनौतियाँ
इस प्रस्ताव पर BRICS देशों के बीच चर्चा जारी है। तकनीकी मानकों और नियामक ढांचे पर सहमति बनाना एक चुनौती होगी। साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता भी अहम मुद्दे हैं। फिर भी, यह पहल BRICS सहयोग को नई दिशा दे सकती है। डिजिटल भुगतान प्रणालियों के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।











