नई दिल्ली (ट्रैवल पोस्ट) Skip the long route of H-1B : अमेरिका में लाखों की संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उनके लिए देश में पढ़ाई के बाद नौकरी का सबसे पारंपरिक रास्ता H-1B वीजा है। सबसे पहले उन्हें ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (OPT) या STEM OPT के तहत काम करना पड़ता है, जिसके बाद वे H-1B वीजा हासिल कर सकते हैं। लेकिन H-1B वीजा में लॉटरी सिस्टम और ज्यादा डिमांड की वजह से हर किसी को ये नहीं मिल पाता है। ऊपर से H-1B वीजा के बाद ग्रीन कार्ड पाने के लिए भी लंबा वेटिंग टाइम है।

भारतीयों के लिए H-1B के जरिए ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता काफी लंबा है, क्योंकि उन्हें परमानेंट रेजिडेंसी पाने के लिए 24 साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, अब बहुत से भारतीय स्टूडेंट्स अमेरिका में जॉब करने और रहने के लिए एक शॉर्टकट रास्ता इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उन्हें आसानी से परमानेंट रेजिडेंसी दिला रहा है। दरअसल, भारतीय छात्र EB-5 इंवेस्टर वीजा का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये वीजा आसानी से ग्रीन कार्ड दिलाता है। एक तरह से ये वीजा H-1B का सबसे अच्छा विकल्प है। इस वीजा के जरिए अमेरिका में ना सिर्फ कहीं भी जॉब की जा सकती है, बल्कि स्थायी रूप से बस सकते हैं।
Skip the long route of H-1B : PR का सबसे आसान रास्ता बन रहा EB-5 प्रोग्राम
इकोनॉमिक्स टाइम्स से बात करते हुए कैलिफोर्निया में स्थित लॉ फर्म के फाउंडर और वकील नदादुर एस. कुमार ने बताया कि अमेरिका में परमानेंट रेजिडेंसी हासिल करने के लिए भारतीयों के बीच EB-5 प्रोग्राम सबसे पॉपुलर और तेज रास्ता बन रहा है। वे इस वीजा प्रोग्राम के जरिए आसानी से देश में स्थायी रूप से बस रहे हैं। इसका इस्तेमाल स्टूडेंट्स भी कर रहे हैं।












