सबसे खतरनाक ड्रोन को बदलेगी अमेरिकी वायुसेना, लाएगी सस्ता विकल्प

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अमेरिकी वायुसेना का MQ-9 रीपर के विकल्प के लिए नया प्रयास

अमेरिकी वायुसेना ने MQ-9 रीपर ड्रोन के विकल्प के लिए योजना बनाई है। वे 2026 के अंत तक सस्ते और त्यागने योग्य ड्रोन बनाने के लिए विक्रेताओं का चयन करेंगे। ये नए ड्रोन लगातार निगरानी, खुफिया जानकारी और हमला करने में सक्षम होंगे।

नई तकनीक से बदलेगी रणनीति

वायुसेना का लक्ष्य कम लागत वाले ड्रोन बनाना है। ये ड्रोन पारंपरिक महंगे ड्रोन की तुलना में अधिक प्रभावी होंगे। MQ-9 रीपर वर्तमान में आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाता है। नए ड्रोन को उसी मिशन को नए तरीके से पूरा करना होगा। यह तकनीक युद्ध के मैदान में बड़ा बदलाव ला सकती है।

वायुसेना अधिकारियों के अनुसार ये ड्रोन आसानी से बनाने योग्य होंगे। इनकी संख्या अधिक होगी और लागत कम होगी। पुराने ड्रोन की तुलना में ये अधिक लचीले साबित होंगे। ये ड्रोन दुश्मन के इलाके में गहराई तक जा सकेंगे।

भविष्य की जरूरतों पर ध्यान

वायुसेना का मानना है कि भविष्य के युद्ध में महंगे और कम संख्या वाले हथियार कम कारगर होंगे। सस्ते और अधिक संख्या वाले हथियार अधिक फायदेमंद साबित होंगे। ये ड्रोन विभिन्न प्रकार के मिशन को अंजाम दे सकेंगे।

नए ड्रोन को “एट्रिटेबल” यानी त्यागने योग्य बनाया जाएगा। इसका मतलब है कि युद्ध में नष्ट होने पर भी कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। यह रणनीति चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों से निपटने में मददगार होगी।

तकनीकी विकास की समयसीमा

वायुसेना ने इस परियोजना के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है। 2026 के अंत तक विक्रेताओं का चयन होगा। इसके बाद प्रोटोटाइप विकसित किए जाएंगे। परीक्षण के बाद ही इन्हें सेना में शामिल किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सही दिशा में है। कम लागत वाले ड्रोन से रक्षा बजट में भी बचत होगी। अधिक जानकारी के लिए एयर एंड स्पेस फोर्सेज की वेबसाइट देखें। साथ ही डिफेंस न्यूज़ पर भी नवीनतम अपडेट मिलेंगे।

एमक्यू-9 रीपर ड्रोन पिछले दो दशकों से सेवा में है। यह ड्रोन आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने में सफल रहा है। नए ड्रोन की मदद से यह क्षमता और बेहतर होगी। भारत जैसे देश भी इस तकनीक पर नजर रख सकते हैं।

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