खुलासा: पाकिस्तान ने ईरान को एयरबेस पर विमान खड़ा करने दिया

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पाकिस्तान ने अमेरिकी संघर्ष के दौरान ईरान को सैन्य विमान पार्क करने दिए, रिपोर्ट

पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में खुलासा किया है, जिसमें बताया गया है कि अमेरिका के सैन्य अभियानों के दौरान पाकिस्तान ने ईरान को अपनी सीमा के अंदर सैन्य विमानों को पार्क करने की अनुमति दी थी। यह विमान ईरानी वायुसेना के थे, जिनमें एक RC-130 भी शामिल थी। यह घटना तब हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर था। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने इन विमानों को नूर खान एयरबेस पर रखने की अनुमति दी थी।

नूर खान एयरबेस पर ईरानी विमानों की तैनाती

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर ईरानी विमानों को पार्क करने की यह सुविधा 1980 के दशक के अंत या 1990 के दशक की शुरुआत में दी गई थी। इस समय, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को तेज कर दिया था। विशेष रूप से, इनमें से कई ऑपरेशन अफगानिस्तान और इराक में किए गए थे। पाकिस्तान ने इस रणनीतिक समर्थन के साथ अपने संबंधों को जोड़ा था। यह कदम ईरान को अपने विमानों को सुरक्षित रखने का एक तरीका प्रदान करता था।

पाकिस्तान-ईरान के बीच गुप्त समझौते का खुलासा

एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पाकिस्तान और ईरान के बीच यह एक गुप्त समझौता था, जिसे आम जनता से छिपाकर रखा गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते में पाकिस्तान ने ईरान को अपने वायु सेना के आधार पर विमानों को पार्क करने की अनुमति दी थी। यह कदम अमेरिकी दबाव के बावजूद लिया गया था, जब अमेरिका ने ईरान को अपने सैन्य अभियानों में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया था। इस समझौते ने ईरान को रणनीतिक रूप से मदद की, जबकि पाकिस्तान ने इसे एक मित्रवत कार्रवाई के रूप में देखा।

अमेरिकी प्रतिक्रिया और भविष्य के निहितार्थ

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिकी नीतियों के विपरीत था। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है। पाकिस्तान को अब इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन से स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है। भविष्य में, यह घटना पाकिस्तान के रणनीतिक निर्णयों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, इससे ईरान और पाकिस्तान के गहरे संबंधों का संकेत मिलता है, जो आज भी जारी हैं।

निष्कर्ष: पाकिस्तान की भूमिका और क्षेत्रीय असर

इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान ने ईरान को सैन्य सहायता दी, जो अमेरिकी संघर्ष के दौरान महत्वपूर्ण साबित हुई। यह कदम दोनों देशों के बीच गहरे सुरक्षा सहयोग को दर्शाता है। भविष्य में, इस घटना के क्षेत्रीय प्रभाव हो सकते हैं, खासकर अफगानिस्तान और मध्य पूर्व में। पाकिस्तान को अपने विदेश नीति के फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। यह घटना एक ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो रहा था, लेकिन इससे यह साबित होता है कि गुप्त संबंध कितने मजबूत हो सकते हैं।
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