दुबई और लंदन के हवाई अड्डे सबसे ज्यादा उत्सर्जन कर रहे
एक नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। ओडीआई ग्लोबल की स्टडी के मुताबिक, दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और लंदन हीथ्रो एयरपोर्ट दुनिया के सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाले हवाई अड्डे हैं। साल 2023 में दुनिया के 20 सबसे बड़े हवाई अड्डों ने कुल एविएशन CO2 उत्सर्जन का 27.3% हिस्सा अकेले उत्सर्जित किया। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है।
रिपोर्ट में बताया गया कि दुबई एयरपोर्ट और लंदन हीथ्रो का उत्सर्जन स्तर सबसे ऊपर है। ODI Global के विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की वजह से यह स्थिति बन रही है। बड़े हवाई अड्डों से लाखों उड़ानें हर दिन संचालित होती हैं। इसीलिए उत्सर्जन का यह आंकड़ा इतना अधिक है। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए नई तकनीकों की जरूरत है।
कार्बन उत्सर्जन का भारी असंतुलन
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सिर्फ 20 हवाई अड्डों ने 2023 में 27% से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित किया। यह पूरे एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है। ओडीआई ग्लोबल का कहना है कि कुछ हवाई अड्डों पर उत्सर्जन का जोर केंद्रित है। इसे कम करने के लिए नियामक उपायों की आवश्यकता है। कार्बन ब्रीफ की स्टडी भी इसी ओर इशारा करती है।
लंदन हीथ्रो और दुबई एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती हैं। इसलिए इन्होंने सबसे अधिक उत्सर्जन किया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि छोटे हवाई अड्डों की तुलना में बड़े हवाई अड्डे कम कुशल तरीके से काम कर रहे हैं। उन्हें ईंधन का अधिक उपयोग करना पड़ता है। नतीजतन, कार्बन उत्सर्जन में भारी इजाफा हुआ है।
भविष्य के लिए क्या उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई अड्डों पर कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए नई नीतियां जरूरी हैं। सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के उपयोग पर जोर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक विमानों की तकनीक विकसित करने से भी मदद मिलेगी। रिपोर्ट में सरकारों से सख्त नियम बनाने की सिफारिश की गई है। ताकि उत्सर्जन को कम किया जा सके।
दुबई और लंदन जैसे बड़े हवाई अड्डों को अपने बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा। ओडीआई ग्लोबल की यह पॉलिसी ब्रीफ हमें याद दिलाती है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कार्रवाई तत्काल आवश्यक है। यूरोप और मिडिल ईस्ट के देशों को इस दिशा में और प्रयास करने होंगे।











