ATOAI द्वारा आयोजित भारतीय साहसिक पर्यटन जोखिम प्रबंधन सेमिनार
भारतीय साहसिक पर्यटन जोखिम प्रबंधन सेमिनार नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इसका आयोजन ATOAI (एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने किया। इस सेमिनार में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वैश्विक साहसिक पर्यटन विशेषज्ञ, बचाव पेशेवर, बीमा कंपनियां, अभियान नेता और उद्योग हितधारक शामिल हुए। यह सेमिनार सुरक्षा, स्थिरता और जिम्मेदार विकास पर केंद्रित था। भारत में साहसिक पर्यटन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए ऐसी चर्चाएं अत्यंत आवश्यक थीं।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि साहसिक पर्यटन में सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने जोखिम प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ सुरक्षा मानकों को लागू करना जरूरी है। इससे पर्यटकों का विश्वास बढ़ेगा। साथ ही देश की छवि भी सुधरेगी। भारत सरकार का पर्यटन विभाग इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।
सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन पर विशेषज्ञों की सिफारिशें
वैश्विक विशेषज्ञों ने साहसिक गतिविधियों के दौरान जोखिम कम करने के उपाय सुझाए। उन्होंने कहा कि बचाव दलों को प्रशिक्षित करना जरूरी है। बीमा कंपनियों को भी विशेष पॉलिसी विकसित करनी चाहिए। अभियान नेताओं को सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करना चाहिए। सेमिनार में ट्रैकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग और वॉटर स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं बनाने पर चर्चा हुई। ATOAI की आधिकारिक वेबसाइट पर इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।
सेमिनार में पर्यावरणीय स्थिरता पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि साहसिक पर्यटन को प्रकृति के अनुकूल होना चाहिए। पर्यटन स्थलों पर कचरे का प्रबंधन जरूरी है। स्थानीय समुदायों को भी इस क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए। इससे आर्थिक लाभ होगा और संसाधनों का संरक्षण भी होगा।
भारत में साहसिक पर्यटन का भविष्य
भारत में साहसिक पर्यटन क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार भी इसे बढ़ावा देने के लिए नीतियां बना रही है। इस सेमिनार में जोखिम प्रबंधन पर साझा रणनीति तैयार की गई। इससे उद्योग को एक नई दिशा मिलेगी। सुरक्षा मानकों को लागू करने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सेमिनार के अंत में एक कार्य योजना बनाई गई। इसमें प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार शामिल है। साथ ही बीमा कंपनियों के साथ साझेदारी भी बढ़ाई जाएगी। आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे साहसिक पर्यटन को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी। संगठन ने कहा कि अगले वर्ष भी इसी विषय पर बड़ा आयोजन किया जाएगा।
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