पायलट की कॉकपिट में झपकी: EASA हाँ, FAA ना

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जर्मन पायलटों में कॉकपिट रेस्ट का व्यापक उपयोग

जर्मन पायलटों पर किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि लंबी दूरी की उड़ानों के दौरान कॉकपिट में नियंत्रित आराम का व्यापक रूप से उपयोग होता है। यह अभ्यास थकान प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश पायलटों ने स्वीकार किया कि वे उड़ान के दौरान छोटी झपकी लेते हैं। यह एक नियोजित प्रक्रिया है, जिसमें सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है।

नियंत्रित आराम के सख्त नियम

यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) के नियमों के तहत, कॉकपिट में छोटी झपकी सख्त सुरक्षा प्रक्रियाओं के अधीन है। पायलटों को एक समय में अधिकतम 20 से 40 मिनट का आराम दिया जाता है। दूसरा पायलट पूरी तरह से सतर्क और उड़ान नियंत्रण में रहता है। इस दौरान विमान का संचालन पूरी तरह से जाग्रत पायलट के हाथ में होता है। आराम करने वाले पायलट को विशेष झपकी सीट पर बैठना अनिवार्य है।

NASA के शोध के महत्वपूर्ण निष्कर्ष

NASA के शोध ने साबित किया है कि नियोजित आराम थकान को कम करने में अत्यंत प्रभावी है। लंबी दूरी की उड़ानों में पायलटों की सतर्कता बनाए रखने के लिए यह तकनीक महत्वपूर्ण है। शोध के अनुसार, नियोजित झपकी से पायलटों की प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होता है। इससे उड़ान के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। विमानन उद्योग में थकान प्रबंधन एक गंभीर चिंता का विषय है।

सुरक्षा और थकान प्रबंधन का संतुलन

विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और थकान प्रबंधन के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। कॉकपिट रेस्ट के दौरान विमान स्वचालित पायलट मोड पर चलता है। हालांकि, जाग्रत पायलट हर समय सिस्टम की निगरानी करता रहता है। यह तकनीक कई एयरलाइनों में पहले से प्रचलित है। भारत में भी विमानन नियामक डीजीसीए इस दिशा में कदम उठा रहा है। EASA नियमों का पालन वैश्विक स्तर पर किया जाता है।

पायलटों की प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएं

सर्वेक्षण में अधिकांश पायलटों ने नियंत्रित आराम के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होता है। विमानन सुरक्षा के क्षेत्र में यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली से यह प्रक्रिया और सुरक्षित हो सकती है। NASA के शोध से पता चलता है कि सही तरीके से झपकी लेने पर मस्तिष्क की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है। ऐसे में, कॉकपिट रेस्ट सुरक्षित उड़ान संचालन का अभिन्न अंग बन चुका है। यह अभ्यास वैश्विक विमानन उद्योग में थकान प्रबंधन की दिशा में एक प्रभावी समाधान है।

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