नई दिल्ली। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने वैश्विक पेमेंट टेक्नोलॉजी कंपनी Mastercard के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत में डिजिटल पर्यटन, पर्यटक खर्च की मैपिंग, और स्मार्ट ट्रैवल इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
सरकार का कहना है कि यह MoU भारत को “डेटा-संचालित पर्यटन नीति” और “गंतव्यों की बेहतर योजना” के लिए मदद करेगा, जबकि Mastercard इसे भारत के लिए एक “पर्यटन इनसाइट्स हब” बनाने की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है।
MoU में क्या-क्या शामिल है?
पर्यटन डेटा और इनसाइट्स साझा करना
Mastercard अपने नेटवर्क से मिलने वाले अनामित (anonymised) डेटा का उपयोग पर्यटन मंत्रालय को देगा-
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देशी व विदेशी पर्यटक कहाँ खर्च कर रहे हैं
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किस सीजन में कौन-सा डेस्टिनेशन लोकप्रिय
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शहर बनाम ग्रामीण पर्यटन का ग्रोथ पैटर्न
यह डेटा नीति-निर्माण के लिए उपयोगी होगा।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
पर्यटक-प्रधान शहरों, स्मारकों और राष्ट्रीय पार्कों में कैशलेस भुगतान को आसान बनाने के लिए तकनीकी सहयोग।
पर्यटन MSME को लाभ
छोटे होटल, गाइड, होमस्टे व ट्रैवल MSME को डिजिटल टूल्स और पेमेंट समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्मार्ट डेस्टिनेशन डेवलपमेंट
Mastercard अपने “Priceless Cities” मॉडल के आधार पर भारत के चुनिंदा गंतव्यों में विशेष अनुभव-आधारित कार्यक्रम विकसित करेगा।
सरकार ने इसे क्यों अहम माना?
पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, भारत को 2030 तक $250 बिलियन टूरिज्म इकॉनमी बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए
मजबूत डेटा ,बेहतर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल टेक पार्टनरशिप की आवश्यकता है। यह MoU उसी दिशा में आधार तैयार करता है।
पर्यटकों को कैसे मिलेगा फायदा?
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यात्रा अनुभव अधिक डिजिटल, तेज़ और सुरक्षित होगा
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कार्ड पेमेंट स्वीकार्यता बढ़ेगी
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ट्रैवल प्लानिंग के लिए नई इनसाइट्स आधारित सेवाएँ
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ग्रामीण और छोटे शहरों में भी डिजिटल सुविधा मजबूत होगी
🇮🇳 भारत के पर्यटन का भविष्य
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह साझेदारी भारत को “भविष्य-तैयार पर्यटन अर्थव्यवस्था” बनाने में मदद कर सकती है।
डिजिटल भुगतान, स्मार्ट मैपिंग, डेटा-इनसाइट्स और नए पर्यटन उत्पाद मिलकर भारत की ग्लोबल प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएंगे।












