विश्व रक्षा बाजार में अब तक बनाए गए सबसे महंगे फाइटर जेट्स की सूची सामने आई है। यह सूची अनुमानित इकाई लागत के आधार पर क्रमबद्ध है। एक रणनीतिक बॉम्बर को इस विश्लेषण में आउटलीयर के तौर पर रखा गया है। सूची में शामिल हर जेट मॉडल उन्नत तकनीक और उच्च निर्माण लागत के साथ आता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला कि आवश्यक तकनीकी साझा मॉडल लागत को प्रभावित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से लागत में कमी की उम्मीदें भी उठती हैं। यह प्रगति रक्षा-नीतियों पर नया दृष्टिकोण दे सकती है। अक्सर ऐसी सूची खरीद-निर्णयों की दिशा तय करती है और वित्तीय जोखिम को समझने में मदद करती है।
सबसे महंगे फाइटर जेट्स की सूची
यह रैंकिंग रक्षा उद्योग और सरकारों के लिए एक संकेतक है। यह संकेतक बताता है कि किन मॉडलों की कीमतें उच्च रहती हैं और क्यों। सबसे महंगे मॉडल अक्सर उन्नत एयरफ्रेम, एडवांस्ड कम्प्यूटिंग इक्विपमेंट व हाई-परफॉर्मेंस इंजन से लैस होते हैं। उच्च लागत में उत्पादन के साथ रखरखाव और प्रशिक्षण खर्च भी शामिल होते हैं। आधुनिक रडार, मिसाइल कॉम्प्लेक्स और सॉफ्टवेयर-अपग्रेड लागत को बढ़ाते हैं। निर्माता कंपनियां नई पीढ़ी के टेक्नोलॉजी पर बड़े अनुसंधान-विकास खर्च करती हैं। आपरेशन, प्रशिक्षण और पार्ट्स सप्लाई भी जीवन-चक्र लागत बढ़ाते हैं। उदा., F-35 Lightning II जैसे मॉडल उच्च लागत का प्रतीक हैं। इनके साथ विदेशी अनुबंधों से लागत प्रबंधन के नए मॉडल सामने आते हैं।
कैसे मापा जाता है लागत?
लागत मापन के नियम सरल नहीं होते, क्योंकि जीवन-चक्र अनुमान बदलता रहता है। खरीद मूल्य के अलावा डाउन-टाइम, संरक्षण, वर्क-ऑर्डर और प्रशिक्षण खर्च जोड़ते हैं। डायनेमिक डिलिवरी शेड्यूल और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी लागत में बदलाव लाती है। इस तरह, एक मॉडल की कुल लागत खरीद के बाद बढ़ती है। डिज़ाइन-परिवर्तनों के कारण भी मूल्य बदलते हैं। सॉफ्टवेयर अपडेट और प्रशिक्षण लागत हर वर्ष बदली जाती है। बिक्रेताओं के अनुसार अनुबंध शर्तें भी लागत पर असर डालती हैं। FlightGlobal जैसी साइट पर आंकड़े तुलना में मददगार रहते हैं।
अधिक जानकारी के संदर्भ के लिए देखें: FlightGlobal Defence Coverage.
बेंचमार्क आउटलीयर और निष्कर्ष
बेंचमार्क आउटलीयर के रूप में एक स्ट्रैटेजिक बॉम्बर को रखा गया है। यह दिखाता है कि लागत असमानताओं को कैसे माना जाता है। 10 शीर्ष महंगे जेट्स की सूची सरकारों के लिए खरीद निर्णयों पर फोकस बनाती है। यह स्पष्ट करता है कि किसे निवेश करना चाहिए और कितनी लागत उठानी है। सूचना की पारदर्शिता रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक है। इस सूचकांक से नीति-निर्माताओं को चयन-उपाय मिलते हैं। स्थानीय उद्योग भागीदारी लागत नियंत्रण की दिशा देता है। अंततः, यह सूची रक्षा बजट के लिए एक चेतावनी भी है।
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