एयरबस का वैश्विक विमानन पूर्वानुमान: 2026-2045 तक 42,060 नए विमानों की मांग
एयरबस ने वैश्विक हवाई यात्रा में निरंतर दीर्घकालिक वृद्धि का अनुमान लगाया है। कंपनी के 2026-2045 वैश्विक बाजार पूर्वानुमान के अनुसार, इस दौरान 42,060 नए यात्री और कार्गो विमानों की आवश्यकता होगी। यह वृद्धि शहरीकरण, आर्थिक विकास और विस्तारित मध्यम वर्ग के कारण होगी। एयरबस का कहना है कि वैश्विक यात्री यातायात प्रति वर्ष 3.6% की दर से बढ़ेगा।
भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख योगदान
इस पूर्वानुमान में भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। एयरबस के अनुसार, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनने जा रहा है। आने वाले वर्षों में भारत में नए विमानों की भारी मांग देखी जाएगी। एशिया-प्रशांत क्षेत्र कुल नए विमानों की मांग में 45% का योगदान देगा। यह क्षेत्र तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ती आय के कारण प्रेरित होगा।
नई तकनीक और ईंधन दक्षता पर जोर
एयरबस ने अपने पूर्वानुमान में नई तकनीकों पर भी ध्यान केंद्रित किया है। कंपनी ईंधन दक्षता और कार्बन उत्सर्जन में कमी पर जोर दे रही है। नए विमानों में उन्नत इंजन और हल्के सामग्री का उपयोग होगा। इससे पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा और परिचालन लागत कम होगी। एयरबस का लक्ष्य 2035 तक हाइड्रोजन-संचालित विमान लॉन्च करना है।
कार्गो बाजार का विस्तार
कार्गो विमानों की मांग भी बढ़ेगी। ई-कॉमर्स और आपूर्ति श्रृंखला के वैश्वीकरण के कारण यह वृद्धि होगी। एयरबस के अनुसार, 2026-2045 के बीच 880 नए कार्गो विमानों की आवश्यकता होगी। इसमें अधिकांश विमान मौजूदा यात्री विमानों के रूपांतरण से आएंगे। इससे एयरलाइनों को कार्गो सेवाओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
भारतीय एयरलाइनों के लिए अवसर
भारतीय एयरलाइनों के लिए यह एक बड़ा अवसर है। एयरबस ने भारत में लगभग 2,500 नए विमानों की डिलीवरी का अनुमान लगाया है। यह विमान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर सेवा देंगे। भारत का विमानन बाजार तेजी से बढ़ रहा है और यह वैश्विक विमानन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। अधिक जानकारी के लिए एयरबस के आधिकारिक बयान और भारतीय विमानन बाजार के विश्लेषण पर जाएं।
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