उड्डयन मंत्री की मैसूर बैठक: UDAN-FTO सुधार पर क्या फैसला?

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नागरिक उड्डयन मंत्री की अध्यक्षता में बैठक, उड़ान योजना के अगले चरण पर चर्चा

कर्नाटक के मैसूरु में शुक्रवार को नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उड़ान योजना के अगले चरण, फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (एफटीओ) पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (आईजीआरयूए) के परिवर्तन पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। यह बैठक विमानन क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उड़ान योजना का अगला चरण और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी

बैठक में सबसे अहम विषय उड़ान योजना का अगला चरण था। इस योजना का उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देना है। सरकार छोटे शहरों और कस्बों को हवाई सेवाओं से जोड़ना चाहती है। इससे आम लोगों को सस्ती और सुलभ हवाई यात्रा मिल सकेगी। मंत्री ने बताया कि नए चरण में अधिक मार्गों को शामिल करने की योजना है। साथ ही, हेलीकॉप्टर और सीप्लेन सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे दूरदराज के इलाकों में भी हवाई सेवा पहुंचेगी।

समिति के सदस्यों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के क्रियान्वयन पर अपने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि उड़ान योजना के अगले चरण में टियर-2 और टियर-3 शहरों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन और व्यापार के नए अवसर भी खुलेंगे। सरकार ने इस दिशा में कई राज्यों के साथ साझेदारी की है।

फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों में सुधार और पायलट प्रशिक्षण

बैठक का दूसरा प्रमुख विषय फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (एफटीओ) पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार था। विमानन क्षेत्र में पायलटों की कमी एक बड़ी चुनौती है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस कमी को दूर करने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करना चाहता है। मंत्री ने कहा कि एफटीओ की संख्या बढ़ाने और उनके मानकों को उन्नत करने की आवश्यकता है। नए नियमों से पायलट प्रशिक्षण अधिक किफायती और समयबद्ध होगा।

समिति ने पायलट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने का सुझाव दिया। सिमुलेटर प्रशिक्षण को अधिक महत्व देने की बात भी हुई। इससे पायलटों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। साथ ही, भारतीय युवाओं को विदेशों में प्रशिक्षण के बजाय भारत में ही अवसर मिलेंगे। इससे रोजगार सृजन भी होगा। मंत्रालय ने 2030 तक पायलटों की मांग को पूरा करने के लिए रोडमैप तैयार किया है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी का परिवर्तन

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (आईजीआरयूए) के आधुनिकीकरण पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस अकादमी को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। मंत्री ने बताया कि अकादमी में बुनियादी ढांचे का उन्नयन किया जाएगा। नए विमानों और उपकरणों की खरीद के लिए बजट आवंटित किया गया है। अकादमी में छात्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए नई शाखाएं खोली जाएंगी।

आईजीआरयूए के परिवर्तन से भारतीय पायलटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिलेगा। इससे वैश्विक विमानन बाजार में भारतीय पायलटों की मांग बढ़ेगी। समिति ने इस परिवर्तन को तेजी से लागू करने की सिफारिश की। मैसूरु में भी एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण इस परियोजना में तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।

बैठक का निष्कर्ष और भविष्य की योजना

बैठक में सभी सदस्यों ने विमानन क्षेत्र के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। मंत्री नायडू ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सुरक्षित, किफायती और व्यापक हवाई सेवा उपलब्ध कराना है। उड़ान योजना का नया चरण दिसंबर 2024 तक लॉन्च किया जाएगा। इससे पहले राज्यों और हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। एफटीओ में सुधार के लिए एक विशेष कार्यबल का गठन किया गया है।

सरकार का लक्ष्य विमानन क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाना है। इससे न केवल कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। आगामी महीनों में इन योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा जारी की जाएगी।

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