डेल्टा एयर लाइन्स पर सैन्य अवकाश भुगतान को लेकर मुकदमा
अमेरिकी विमानन कंपनी डेल्टा एयर लाइन्स इन दिनों कानूनी पचड़े में है। कंपनी के खिलाफ सैन्य अवकाश के दौरान वेतन न देने का मुकदमा आगे बढ़ गया है। यह मामला करीब 3,300 पायलटों से जुड़ा है। ये सभी पायलट यूजरआरए (USERRA) कानून के तहत सुरक्षा मांग रहे हैं। अदालत ने इस क्लास एक्शन मुकदमे को आगे बढ़ाने का आदेश दिया है। डेल्टा पर आरोप है कि उसने सैन्य ड्यूटी पर गए पायलटों को पूरा वेतन नहीं दिया। इससे पायलटों को आर्थिक नुकसान हुआ है।
यूजरआरए कानून क्या कहता है?
यूजरआरए यानी यूनिफॉर्म्ड सर्विसेज एम्प्लॉयमेंट एंड रीएम्प्लॉयमेंट राइट्स एक्ट सैन्य कर्मियों के अधिकारों की रक्षा करता है। इस कानून के तहत नियोक्ता को सैन्य ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की नौकरी बचानी होती है। साथ ही वेतन और लाभ भी जारी रखने होते हैं। डेल्टा ने इसी कानून का उल्लंघन किया है। कंपनी ने पायलटों को सैन्य अवकाश के दौरान केवल आधा वेतन दिया। इसके अलावा कुछ मामलों में वेतन रोक दिया गया। पायलट संगठन का कहना है कि डेल्टा का यह कदम कानून के खिलाफ है।
पायलटों का दर्द और संघर्ष
प्रभावित पायलटों में से कई ने वायुसेना और नेशनल गार्ड में सेवा दी है। उनका कहना है कि डेल्टा ने उन्हें आर्थिक रूप से असुरक्षित कर दिया। एक पायलट ने बताया कि सैन्य ड्यूटी के दौरान उन्हें कर्ज लेना पड़ा। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। यह मुकदमा संघीय अदालत में चल रहा है। अदालत ने मामले को आगे बढ़ाने का फैसला सुनाया है। डेल्टा ने अपने बचाव में कहा है कि उसने सभी नियमों का पालन किया है। हालांकि, अदालत ने प्रथम दृष्टया डेल्टा की दलीलों को खारिज कर दिया है। इससे पायलटों में उम्मीद जगी है।
डेल्टा का पक्ष और बचाव
डेल्टा एयर लाइन्स ने अदालत में दलील दी है कि वह सैन्य अवकाश का पूरा सम्मान करती है। कंपनी के वकीलों का कहना है कि पायलटों को जो वेतन दिया गया, वह नीति के अनुरूप था। डेल्टा ने यह भी कहा कि यह मामला गलतफहमी पर आधारित है। कंपनी ने अदालत से अपील की है कि मुकदमे को खारिज किया जाए। लेकिन जज ने कंपनी की दलीलों पर विश्वास नहीं किया। इस सुनवाई का असर अन्य एयरलाइनों पर भी पड़ सकता है। कई एयरलाइनें अब अपनी नीतियों की समीक्षा कर रही हैं। यह मामला पूरे विमानन उद्योग के लिए एक सबक बन सकता है। सैन्य कर्मियों के अधिकारों की सुरक्षा अब और सख्ती से होगी।
आगे की राह और संभावित असर
यह मुकदमा अमेरिकी श्रम कानूनों में एक मिसाल बन सकता है। अगर पायलट यह केस जीत जाते हैं, तो डेल्टा को बड़ा मुआवजा देना होगा। साथ ही सभी प्रभावित पायलटों को बकाया वेतन मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डेल्टा को बिना लड़े समझौता करना चाहिए। इससे कंपनी की छवि पर सकारात्मक असर पड़ेगा। इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने होगी। पायलट यूनियन ने सभी सदस्यों से एकजुट रहने की अपील की है। जहां तक कानूनी लड़ाई का सवाल है, यह अभी लंबी चलने वाली है। लेकिन पायलटों का हौसला बुलंद है।
यह भी पढ़ें: व्यापार और विमानन की ताजा खबरें
संदर्भ: यूजरआरए कानून की जानकारी
Related: 7 साल बाद क्यों लौटा डेल्टा नरीता? 2027 सिएटल से उड़ान












