पर्यटन नीति में बदलाव का आह्वान
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भारत की पर्यटन नीति में बुनियादी बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए। बल्कि प्रामाणिक और अनुभव-आधारित पर्यटन विकसित करना जरूरी है। इससे हर पर्यटक भारत की सभ्यता और संस्कृति का राजदूत बनेगा। यह बात उन्होंने दूसरे वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कही। इस सम्मेलन में कई विशेषज्ञ और उद्योग जगत के नेता शामिल हुए।
मूल्य वर्धित पर्यटन पर जोर
शेखावत ने कहा कि पर्यटन नीति में मूल्य वृद्धि पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। पर्यटकों को सिर्फ देखने नहीं, बल्कि अनुभव करने का मौका देना होगा। इसके लिए स्थानीय संस्कृति और विरासत को उजागर करना जरूरी है। उदाहरण के लिए, पर्यटकों को वहां की परंपराओं और खान-पान में शामिल किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यटन का मूल्य बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। भारत की अद्भुत पर्यटन स्थल यात्रा करना हर किसी का सपना होता है।
सांस्कृतिक राजदूत बनाएँ पर्यटक
मंत्री ने जोर देकर कहा कि हर पर्यटक भारत का सांस्कृतिक राजदूत बन सकता है। यह तभी संभव है जब वे वास्तविक अनुभव प्राप्त करें। पर्यटन क्षेत्र में नए आयाम जोड़ने पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि हस्तशिल्प, योग और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देना। इससे पर्यटक भारत की समृद्ध विरासत को समझेंगे। वे अपने देशों में वापस जाकर इसका प्रचार-प्रसार करेंगे। इससे भारत का वैश्विक आकर्षण बढ़ेगा। पर्यटन मंत्रालय की नीतियाँ इस दिशा में काम कर रही हैं।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी
इस रणनीति में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी जरूरी है। जब पर्यटक स्थानीय लोगों से मिलेंगे, तो उन्हें सही अनुभव मिलेगा। इससे छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। होमस्टे और स्थानीय बाजारों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है। पर्यटन नीति में यह बदलाव आने वाले वर्षों में बड़ा प्रभाव डालेगा। शेखावत ने कहा कि हमें पर्यटन को एक जीवंत अनुभव बनाना है। इससे भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी।
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