परिचय और लक्ष्य
Chambal क्षेत्र की Indian School of Nature (ISN) ने इस साल दो प्रमुख डिजिटल प्लेटफार्म पेश किए। होटल के लिए कार्बन बैलेंस शीट और टूर ऑपरेटरों के लिए इतिरेरी कार्बन कैलकुलेटर इनमें मुख्य हैं। ISN का लक्ष्य है होटल, रिसॉर्ट और ट्रैवल ऑपरेटर के पर्यावरणीय प्रभाव को साफ समझना। ISN का यह कदम पर्यटन उद्योग की स्थिरता को मजबूत करेगा। यह परियोजना स्थानीय व्यवसायों में जिम्मेदार यात्रा को प्रोत्साहित करती है। यह कदम पर्यावरणीय फीडबैक और सुधार की दिशा को तेज करेगा। यह कदम पर्यटन क्षेत्र के लिए नई डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाता है। स्थानीय होटल श्रृंखला इस पहल से लाभ उठा सकती है।
नए टूल्स की मौलिक खूबियाँ
इन प्लेटफार्मों को डेटा-आधारित मापन के लिए तैयार किया गया है। इन प्लेटफार्मों से वास्तविक कार्बन उत्सर्जन का आंकड़ा मिलता है। यह माप होटल और टूर ऑपरेटर के अभ्यासों को ट्रैक कर सकता है। इसके जरिये कंपनियां सुधारात्मक कदम निर्धारित कर सकती हैं। उपयोगकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण शुरू किया गया है ताकि वे डैशबॉर्ड समझ सकें। डिजिटल डैशबॉर्ड से कंपनियां अपने उत्सर्जन के ट्रेंड देख सकेंगी। डेटा सुरक्षा पर भी पूर्ण ध्यान रखा गया है। उत्पादन प्रक्रिया में नवाचार भी शामिल है ताकि डेटा की गुणवत्ता उच्च रहे। क्लस्टरिंग और तुलना के लिए आंतरिक मानचित्र भी विकसित किए गए हैं।
पर्यावरणीय Footprint मापन और सुधार
इन उपकरणों से पर्यावरणीय फुटप्रिंट मापन सटीक होगा। मानकीकरण से उद्योग में तुलनात्मक आकलन संभव हो सकेगा। यह कदम जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप प्रतिबद्धता बढ़ाता है। ISN के इस प्रयास से स्थानीय समुदाय भी लाभ पाएगा। इन टूल्स को वैश्विक मानदंडों से जोड़ने के लिए GHG Protocol एक मानक के रूप में प्रयुक्त होता है। इससे कार्बन लेखा-जोखा अधिक पारदर्शी बनता है। डेटा साझा करने की नीति पर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र साथ काम कर रहे हैं। डेटा साझा करने की नीति से उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी।
भविष्य की दिशा और सहयोग
ISN अब साझेदारों के साथ मिलकर और उपकरण लाने की योजना बना रहा है। यह नया ढांचा सतत पर्यटन को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। यह पहल ऊर्जा बचत और पानी के प्रयोग में कमी पर केंद्रित होगी। कचरा प्रबंधन में सुधार भी इसके लक्ष्य में शामिल है। वैश्विक मानकों से जुड़ना निरंतर सुधार देगा, SDGs से प्रेरणा मिलती है। स्थानीय समुदायों के साथ परियोजनाओं के लाभ साझा किए जाएंगे। नीति निर्माण में सार्वजनिक भागीदारी बढ़ेगी। यह सहयोग पर्यटन उद्योग को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए एक मजबूत मार्ग बनेगा।












