4 साल बाद कांगड़ा घाटी रेलवे शुरू, जानिए कब?

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चार साल बाद फिर शुरू हुई कांगड़ा घाटी रेलवे सेवा

लगभग चार साल के ठहराव के बाद, ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी रेलवे ने फिर से परिचालन शुरू कर दिया है। इससे हिमाचल प्रदेश की सबसे खूबसूरत रेल यात्राओं में से एक बहाल हो गई है। यह संकीर्ण गेज रेलवे पंजाब के पठानकोट को हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर से जोड़ती है। इसे राज्य का सबसे लंबा टॉय ट्रेन रूट माना जाता है। भारी मानसूनी क्षति के कारण ट्रेन सेवाएं रोक दी गई थीं।

मानसून क्षति के कारण बंद हुई थी सेवा

वर्ष 2020 में आई भीषण बारिश ने इस रेलवे लाइन को भारी नुकसान पहुंचाया था। पटरियां कई जगहों पर धंस गई थीं और भूस्खलन से रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इस वजह से ट्रेनों का संचालन ठप हो गया। प्रशासन ने मरम्मत के लिए लंबी योजना बनाई। अब चार साल बाद मरम्मत का काम पूरा हुआ है। यह रेलवे लाइन ब्रिटिश काल में बनाई गई थी। यह ऐतिहासिक धरोहर है। कांगड़ा घाटी रेलवे के इतिहास में यह बड़ा बदलाव है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस रेलवे के फिर से शुरू होने से हिमाचल के पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह टॉय ट्रेन पहाड़ों, घाटियों और नदियों के बीच से गुजरती है। यात्री यहां प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठा सकते हैं। यह रूट धर्मशाला, पालमपुर और बैजनाथ जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से होकर जाता है। पर्यटकों के लिए यह यात्रा रोमांचक होगी। स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। हिमाचल पर्यटन विभाग ने इस सेवा को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। अब यात्री आसानी से इस खूबसूरत रूट की सवारी कर सकेंगे।

रेलवे का ऐतिहासिक महत्व

कांगड़ा घाटी रेलवे का निर्माण 1928 में हुआ था। यह ब्रिटिश सरकार की देन है। इस रेलवे लाइन को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से हो रही है। यह नैरो गेज लाइन अपनी संकरी पटरियों और धीमी गति के लिए जानी जाती है। यहां ट्रेन की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटा है। पहाड़ों की गोद में यह यात्रा अनोखा अनुभव देती है। प्रशासन ने पटरियों की मरम्मत के बाद सुरक्षा जांच की है। अब सेवा नियमित रूप से चलेगी। यह हिमाचल के लोगों के लिए गर्व की बात है।

सेबी और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस रेलवे सेवा के फिर से शुरू होने से सेबी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। किसान और व्यापारी अब आसानी से माल ढुलाई कर सकेंगे। पर्यटन से जुड़े लोगों को नया जीवन मिलेगा। यह सेवा पर्यावरण के अनुकूल है और प्रदूषण कम करती है। सरकार ने इस रूट को बेहतर बनाने के लिए और योजनाएं शुरू की हैं। यात्रियों को सुविधा देने के लिए नए टिकट काउंटर खोले गए हैं। यह कदम हिमाचल के विकास में मददगार साबित होगा। अब लोग इस ऐतिहासिक यात्रा का आनंद ले सकते हैं।