लक्सन के $242M घाटे वाले बयान पर रोब फाइफ का पलटवार

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एयर न्यूजीलैंड के पूर्व सीईओ ने पीएम पर साधा निशाना

एयर न्यूजीलैंड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रॉब फाइफ ने प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की आलोचना की है। दरअसल, पीएम ने एयरलाइन के वित्तीय वर्ष 2026 के नुकसान पर सार्वजनिक रूप से हमला बोला था। एयरलाइन को इस दौरान 242 मिलियन न्यूजीलैंड डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ है। फाइफ ने इसे अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी से कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचता है।

रॉब फाइफ ने एक साक्षात्कार में कहा कि प्रधानमंत्री का यह कदम गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन उद्योग में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। फाइफ के अनुसार, सरकार को सार्वजनिक रूप से आलोचना करने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र की कंपनियों पर राजनीतिक दबाव सही नहीं है। इससे निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है।

घाटे के असली कारण

एयर न्यूजीलैंड को हुए घाटे के पीछे कई कारण हैं। इसमें ईंधन की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक मंदी शामिल हैं। इसके अलावा, प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। कंपनी ने अपने बयान में कहा था कि यह घाटा अस्थायी है। उन्होंने भविष्य में सुधार का भरोसा जताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइन को अपनी लागत घटानी होगी। साथ ही, नए रूट्स पर ध्यान देना होगा। एयर न्यूजीलैंड की आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध है।

फाइफ ने अपने कार्यकाल में कई चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने 2005 से 2012 तक कंपनी का नेतृत्व किया। उनके समय में एयरलाइन ने अच्छा मुनाफा कमाया था। इसलिए उनकी बात को खास महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम को आर्थिक विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए। सार्वजनिक बयानबाजी से कोई हल नहीं निकलेगा।

राजनीतिक बहस तेज

इस मुद्दे पर देश में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने पीएम के बयान को गलत ठहराया है। उनका कहना है कि सरकार को एयरलाइन की मदद करनी चाहिए। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि घाटे की जांच होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने पहले कहा था कि एयरलाइन का प्रबंधन विफल रहा है। इस पर फाइफ ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे बयान अनुचित हैं।

इस घटनाक्रम से न्यूजीलैंड के कारोबारी जगत में चर्चा है। कई उद्योगपतियों ने फाइफ का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच संवाद बेहतर होना चाहिए। स्टफ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला संसद में भी उठाया जा सकता है। फिलहाल, एयरलाइन के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को अगली तिमाही के नतीजों का इंतजार है। यह देखना होगा कि सरकार और कंपनी के बीच यह खींचतान कब तक जारी रहती है।

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