वानुआतु ने मालेकुला-गौआ में खोले नए सुदूर ट्रेल्स, अब घूमिए

vanuatu-new-remote-trails-malekula-gaua

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

वानुअतु में खुलेंगे सुदूर वन्य क्षेत्रों के नए रास्ते

प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश वानुअतु ने मालकुला और गौआ द्वीपों पर नए ट्रेल्स शुरू किए हैं। ये रास्ते पर्यटकों को अछूते प्राकृतिक सौंदर्य से जोड़ेंगे। यहां घने वर्षावन, झरने और प्राचीन जनजातीय संस्कृति देखने को मिलेगी। यह घोषणा वानुअतु पर्यटन विभाग ने की है।

इन ट्रेल्स का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। पर्यटक अब गांवों में रुककर पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव कर सकेंगे। मालकुला द्वीप अपनी नक्काशी और जादुई रस्मों के लिए मशहूर है। वहीं गौआ द्वीप पर सक्रिय ज्वालामुखी और हरे-भरे जंगल हैं। ये रास्ते आम पर्यटन स्थलों से हटकर असली वानुअतु दिखाएंगे। वानुअतु यात्रा गाइड के अनुसार यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से अक्टूबर के बीच है।

नए ट्रेल्स को तीन श्रेणियों में बांटा गया है – आसान, मध्यम और कठिन। आसान ट्रेल्स परिवारों और बुजुर्गों के लिए उपयुक्त हैं। कठिन ट्रेल्स में रात भर जंगल में कैंपिंग शामिल है। सभी रास्तों पर स्थानीय गाइड तैनात किए गए हैं। ये गाइड पर्यटकों को वनस्पति, औषधीय पौधों और पक्षियों की जानकारी देंगे। सुरक्षा के लिए हर ट्रेल पर साइनेज और आपातकालीन हेल्पलाइन लगाई गई है।

वानुअतु सरकार ने इन इलाकों में बुनियादी ढांचे पर करीब 20 लाख डॉलर खर्च किए हैं। इसमें पुलों की मरम्मत, पैदल पथ और सूचना केंद्र शामिल हैं। पर्यटन मंत्री का कहना है कि इससे दूरदराज के गांवों को रोजगार मिलेगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों के लिए अब वीजा प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है। आधिकारिक वानुअतु पर्यटन वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध है। इस कदम से वानुअतु की अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

ये ट्रेल्स स्थानीय परंपराओं और प्रकृति के बीच संतुलन बनाते हैं। पर्यटकों को यहां ड्रेस कोड और रीति-रिवाजों का सम्मान करना होगा। उदाहरण के लिए, कुछ गांवों में महिलाओं को प्रवेश प्रतिबंधित है। इसलिए ट्रेल शुरू करने से पहले एक अनिवार्य ओरिएंटेशन सेशन होता है। वानुअतु अपने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने में जुटा है। यह पहल दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में एक मिसाल बन सकती है। घूमने की योजना बनाने वालों के लिए यह एक नया साहसिक अवसर है।

Related: जर्मनी का लक्ष्य: भारत से 10 लाख रात्रि प्रवास

और पढ़ें