क्या F-47 को मिलेंगे नए NGAP इंजन?

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GE एयरोस्पेस और प्रैट एंड व्हिटनी ने बनाए उन्नत इंजन

अमेरिकी वायु सेना के लिए बोइंग F-47 लड़ाकू विमान को नई ताकत मिलेगी। GE एयरोस्पेस और प्रैट एंड व्हिटनी कंपनियां XA102 और XA103 एडेप्टिव-साइकिल इंजन विकसित कर रही हैं। ये इंजन बेहद उन्नत तकनीक पर आधारित हैं। ये लड़ाकू विमान की क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे।

एडेप्टिव-साइकिल तकनीक क्या है?

एडेप्टिव-साइकिल इंजन तीन एयरफ्लो स्ट्रीम का उपयोग करता है। यह तकनीक पारंपरिक इंजनों से बेहतर है। यह इंजन ईंधन दक्षता और रेंज बढ़ाता है। साथ ही यह गर्मी प्रबंधन में भी सहायक है। इससे लड़ाकू विमान लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं। GE एयरोस्पेस की आधिकारिक वेबसाइट पर इस तकनीक की विस्तृत जानकारी मिलेगी।

ये इंजन अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं। जब विमान को तेज गति की जरूरत होती है, तब यह अधिक शक्ति देते हैं। वहीं कम गति पर यह ईंधन बचाते हैं। यह सुविधा F-47 को एक बेहतरीन लड़ाकू विमान बनाएगी।

बोइंग F-47 का महत्व

बोइंग F-47 अमेरिकी वायु सेना का अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। यह विमान दुश्मनों पर हावी होने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें उन्नत एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली होगी। नए इंजन इस विमान को और खतरनाक बना देंगे। प्रैट एंड व्हिटनी की साइट पर भी इस विकास के बारे में बताया गया है।

F-47 विमान को 2030 के दशक तक सेवा में शामिल करने की योजना है। यह विमान चीन और रूस जैसे देशों के खिलाफ अमेरिका की ताकत को बढ़ाएगा।

दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा

GE एयरोस्पेस और प्रैट एंड व्हिटनी के बीच इस परियोजना के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। दोनों कंपनियां अपने-अपने इंजनों को बेहतर बनाने में लगी हैं। वायु सेना कई चरणों में इन इंजनों का परीक्षण करेगी। जो इंजन बेहतर होगा, उसे F-47 में लगाया जाएगा। यह तय करेगा कि कौन सी कंपनी अरबों डॉलर का अनुबंध जीतेगी।

दोनों इंजनों में XA102 और XA103 दो अलग-अलग मॉडल हैं। ये दोनों ही एडेप्टिव-साइकिल तकनीक पर आधारित हैं। इनके परीक्षण से साफ होगा कि कौन सा इंजन अधिक विश्वसनीय और शक्तिशाली है।

भारत के लिए सबक

यह विकास भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपने लड़ाकू विमानों के लिए उन्नत इंजन विकसित कर रहा है। GE एयरोस्पेस और प्रैट एंड व्हिटनी की तकनीक से भारत सीख सकता है। भारतीय वायु सेना को भी ऐसे ही एडेप्टिव-साइकिल इंजनों की जरूरत है। इससे लड़ाकू विमानों की रेंज और क्षमता बढ़ेगी।

कुल मिलाकर यह तकनीकी प्रगति लड़ाकू विमानों के भविष्य को बदल देगी। GE और प्रैट एंड व्हिटनी के बीच यह दौड़ रोमांचक है। देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा इंजन F-47 के लिए चुना जाता है।
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