चेन्नई के नए हवाई अड्डे की तलाश में तमिलनाडु को AAI की मदद

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तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला: परांदुर हवाई अड्डा परियोजना रद्द

तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के लिए प्रस्तावित परांदुर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है। यह फैसला कई कारणों से लिया गया, जिसमें भूमि अधिग्रहण विवाद और स्थानीय विरोध प्रमुख रहे हैं। अब सरकार वैकल्पिक स्थलों की पहचान के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की मदद लेगी। इस कदम से चेन्नई की बढ़ती हवाई यातायात जरूरतों को पूरा करने की कोशिश होगी।

परांदुर परियोजना क्यों हुई रद्द?

परांदुर परियोजना चेन्नई के पास कांचीपुरम जिले में बनाई जानी थी। इसके लिए लगभग 5,000 एकड़ जमीन अधिग्रहण की योजना थी। हालांकि, किसानों और पर्यावरणविदों ने इसका जोरदार विरोध किया। उनका कहना था कि इससे कृषि भूमि और जल संसाधन प्रभावित होंगे। सरकार ने लंबी सुनवाई के बाद यह परियोजना रद्द करने का निर्णय लिया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि यह फैसला जनहित में लिया गया है।

AAI की भूमिका और नए स्थलों की तलाश

अब तमिलनाडु सरकार नए हवाई अड्डे के लिए संभावित स्थलों की पहचान करने हेतु AAI से तकनीकी सहायता मांगी है। AAI एक विशेषज्ञ टीम भेजेगी, जो भू-तकनीकी सर्वेक्षण और हवाई यातायात डेटा का विश्लेषण करेगी। संभावित स्थलों में चेंगलपट्टू, तिरुवल्लुर और कांचीपुरम के अन्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संतुलन और स्थानीय समुदायों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए ही स्थल का चयन होगा।

चेन्नई के लिए नया हवाई अड्डा क्यों जरूरी?

चेन्नई का मौजूदा हवाई अड्डा अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। यहां हर साल लगभग 2.3 करोड़ यात्री आते-जाते हैं, जबकि क्षमता सिर्फ 1.8 करोड़ है। बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों के कारण यह दबाव और बढ़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दशक में यात्री संख्या दोगुनी हो सकती है। इसलिए नए हवाई अड्डे की आवश्यकता को टाला नहीं जा सकता। सरकार का लक्ष्य 2028 तक नई परियोजना शुरू करना है।

आर्थिक और विकास पर प्रभाव

नया हवाई अड्डा बनने से तमिलनाडु के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निवेश आकर्षित होगा। राज्य सरकार का मानना है कि सही जगह चुनने से लॉजिस्टिक्स और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, विपक्षी दलों ने परियोजना रद्द करने के फैसले को “विकास में बाधा” बताया है। उनका कहना है कि सरकार को विरोधों के बावजूद परियोजना आगे बढ़ानी चाहिए थी। अब सबकी नज़रें AAI की रिपोर्ट पर होंगी, जो अगले तीन महीनों में सौंपी जा सकती है।

इस पूरे मामले में पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होगी। नए स्थल का फैसला सर्वेक्षण और सार्वजनिक सुझावों के बाद ही होगा। यह कदम तमिलनाडु के हवाई अवसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

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