शादियां अब ‘अनुभव’, दिखावा नहीं: विरासत की ताकत

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भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का बदलता स्वरूप

भारत का डेस्टिनेशन वेडिंग बाजार अब पारंपरिक ‘बिग फैट इंडियन वेडिंग’ से हटकर छोटे, अनुभव-आधारित समारोहों की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव संस्कृति, आध्यात्मिकता और स्थानीय परंपराओं पर केंद्रित है। उद्योग जगत के नेताओं ने यह बात 22 अगस्त को वाराणसी के ताज गंगेस होटल में आयोजित FHRAI 56वें वार्षिक सम्मेलन में कही। ‘पवित्र प्रतिज्ञाएं, शानदार स्थल: भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का भविष्य’ सत्र में यह चर्चा हुई।

छोटे समारोह और गहरे अनुभव की बढ़ती मांग

विशेषज्ञों के अनुसार, जोड़े अब भव्यता से ज्यादा मायने और जुड़ाव को प्राथमिकता दे रहे हैं। वे शादी को एक आयोजन नहीं, बल्कि एक यात्रा के रूप में देखते हैं। इसमें परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेना और वहां की संस्कृति को करीब से जानना शामिल है। उदाहरण के लिए, वाराणसी, उदयपुर और जयपुर जैसे शहरों में आध्यात्मिक अनुष्ठान और ऐतिहासिक स्थलों को शादी में शामिल किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति खासकर विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वे अपनी जड़ों से जुड़ना चाहते हैं।

आतिथ्य उद्योग के लिए नए अवसर

इस बदलाव ने होटल और रिसॉर्ट व्यवसायियों के लिए नए रास्ते खोले हैं। अब वे सिर्फ भव्य हॉल नहीं, बल्कि प्राकृतिक परिवेश और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ अनुभवात्मक पैकेज पेश कर रहे हैं। FHRAI के अध्यक्ष ने कहा कि यह समय है जब हम स्थानीय कारीगरों, व्यंजनों और परंपराओं को बढ़ावा दें। इससे न सिर्फ शादी यादगार बनेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस क्षेत्र में सरकारी सहयोग और बुनियादी ढांचे के विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उदाहरण के लिए, छोटे शहरों में एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बढ़ाना और हेरिटेज प्रॉपर्टीज का संरक्षण करना आवश्यक है।

टिकाऊ और जिम्मेदार वेडिंग की ओर रुझान

पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। कई जोड़े अब सिंगल-यूज प्लास्टिक से बच रहे हैं और स्थानीय वस्तुओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे शादी के खाने में ऑर्गेनिक और क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देते हैं। इससे न सिर्फ कार्बन फुटप्रिंट कम होता है, बल्कि समुदाय को भी लाभ मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ‘सस्टेनेबल वेडिंग’ एक मुख्यधारा बन जाएगी। कई वेडिंग प्लानर अब इको-फ्रेंडली सजावट और रिसाइकिल सामग्री का उपयोग कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति युवाओं में विशेष रूप से देखी जा रही है।

डेस्टिनेशन वेडिंग का भविष्य

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में यह क्षेत्र 30% से अधिक की दर से बढ़ेगा। इसका मुख्य कारण आय में वृद्धि, विदेशी डेस्टिनेशन की बढ़ती लागत और भारत में गुणवत्तापूर्ण स्थलों का विकास है। जैसे-जैसे जोड़े व्यक्तिगत और विशिष्ट अनुभवों को तरजीह दे रहे हैं, वैसे-वैसे होटल उद्योग को अपनी रणनीति बदलनी होगी। FHRAI सम्मेलन में यह संदेश स्पष्ट था कि डेस्टिनेशन वेडिंग अब केवल एक ‘तस्वीर’ नहीं, बल्कि एक ‘भावना’ है। यह बदलाव भारतीय आतिथ्य उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए FHRAI की आधिकारिक वेबसाइट और Make in India देखें।

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