नई दिल्ली (ट्रैवल पोस्ट) 03 नवंबर 2025: भारत की ध्वजवाहक विमान सेवा, एयर इंडिया, एक बार फिर विवादों के घेरे में है। देश का नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) एयर इंडिया के संचालन में गंभीर सुरक्षा और अनुपालन संबंधी कमियों की जांच कर रहा है। यह नई जांच तब सामने आई है जब एक को-पायलट के बिना अनिवार्य पायलट प्रवीणता जांच (PPC) उड़ानें संचालित करने और एक वरिष्ठ कप्तान के समयसीमा समाप्त अंग्रेजी भाषा प्रवीणता (ELP) लाइसेंस के साथ उड़ान भरने का मामला सामने आया है।
ये घटनाएं एयर इंडिया के आंतरिक प्रबंधन में चल रही समस्याओं को एक बार फिर उजागर करती हैं। DGCA द्वारा पहले भी एयरलाइन को अनियमित शेड्यूलिंग और अपर्याप्त आंतरिक ऑडिट के लिए चेतावनी दी जा चुकी है।
Air India once again in controversy क्या हुआ था?
जांच के दो प्रमुख मामले सामने आए हैं:
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अमान्य पायलट प्रवीणता जांच (PPC): एक एयरबस A320 के को-पायलट ने बाय-एनुअल PPC को पूरा किए बिना कई उड़ानें संचालित कीं। PPC पायलटों की तकनीकी और प्रक्रियात्मक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मूल्यांकन है।
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समयसीमा समाप्त भाषा प्रवीणता (ELP): एक वरिष्ठ कप्तान एक्सपायर्ड ELP लाइसेंक के बावजूद उड़ानें संचालित करता रहा। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) द्वारा वैश्विक मार्गों पर स्पष्ट संचार सुनिश्चित करने के लिए ELP अनिवार्य है।
संभावित जोखिम
ये लापरवाहियां सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती हैं:
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बिना ताजा प्रशिक्षण और मूल्यांकन के पायलट का उड़ान भरना आपातकालीन स्थितियों में प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
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अंग्रेजी भाषा की प्रवीणता न होने से एयर ट्रैफिक नियंत्रण के साथ गलतफहमी होने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में।
Air India once again in controversy एयर इंडिया और DGCA की कार्रवाई
इन घटनाओं के सामने आने के बाद:
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एयर इंडिया ने संबंधित पायलटों और शेड्यूलिंग टीम के सदस्यों को ड्यूटी से हटा दिया है और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है।
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एयरलाइन ने अपने क्रू योग्यता प्रबंधन तंत्र की व्यापक ऑडिट शुरू की है।
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DGCA ने एक पूर्ण पैमाने की जांच का आदेश दिया है और एयर इंडिया से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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रेगुलेटर एयरलाइन की अनुपालन निगरानी प्रणालियों की जांच कर रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि अयोग्य कर्मी उड़ानों के लिए कैसे शेड्यूल हो गए।
व्यापक प्रभाव
यह मामला भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र और पर्यटन उद्योग के लिए एक चेतावनी है। एक प्रमुख राष्ट्रीय वाहक में लगातार हो रही ऐसी चूकें अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के विश्वास को ठेस पहुंचा सकती हैं और देश की विमानन सुरक्षा की साख को नुकसान पहुंचा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस को सुरक्षा प्रशिक्षण पर सख्ती बरतनी चाहिए और लाइसेंस नवीनीकरण तथा क्रू दस्तावेज़ों पर नज़र रखने के लिए उन्नत डिजिटल उपकरण अपनाने चाहिए।
एयर इंडिया ने सुधारात्मक कदमों का वादा किया है, लेकिन इन घटनाओं की पुनरावृत्ति एयरलाइन की अनुपालन संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। DGCA की जांच अब यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि एयर इंडिया स्थायी सुधार लागू करे, न कि केवल अस्थायी नुकसान नियंत्रण करे।