एयरबस घूसकांड: पूर्व श्रीलंकाई राष्ट्रपति के बेटे गिरफ्तार

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श्रीलंका में राजापक्ष परिवार को झटका, नामल राजापक्ष गिरफ्तार

कोलंबो में बड़ी खबर सामने आई है। श्रीलंका के विपक्षी सांसद और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजापक्ष के बेटे नामल राजापक्ष को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी लंबे समय से चली आ रही एक विवादास्पद विमान खरीद सौदे की जांच के सिलसिले में हुई है। यह सौदा श्रीलंकाई एयरलाइंस से जुड़ा हुआ है, जिसमें भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने यह कार्रवाई की है।

क्या है पूरा मामला और आरोप?

यह मामला साल 2010 के आसपास का है, जब श्रीलंकाई एयरलाइंस ने एयरबस A330 विमानों की खरीद के लिए अनुबंध किया था। आरोप है कि इस सौदे में कमीशन और रिश्वत का खेल हुआ था, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। नामल राजापक्ष पर आरोप है कि उन्होंने इस सौदे को अंजाम देने में मदद की थी, जबकि वे उस समय आधिकारिक पद पर नहीं थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि विमान खरीद में अमेरिकी दलाल कंपनियों के जरिए पैसे ट्रांसफर किए गए थे, जो संदिग्ध है। इस पूरे प्रकरण में अब तक कई लोगों से पूछताछ हो चुकी है।

नामल राजापक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक असर

गिरफ्तारी के बाद नामल राजापक्ष ने इसे राजनीति से प्रेरित साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सरकार द्वारा विपक्ष को दबाने की कोशिश है। वहीं, उनके समर्थकों का कहना है कि यह मामला पहले ही बंद हो चुका था, लेकिन अब इसे फिर से खोला गया है। यह घटनाक्रम श्रीलंकाई राजनीति में हलचल पैदा कर सकता है, क्योंकि राजापक्ष परिवार का देश की सत्ता में गहरा प्रभाव रहा है। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतर सकता है और सरकार पर दबाव बना सकता है। देखना होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

इस मामले की जांच से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी के लिए आप न्यूज़18 हिंदी पर विस्तृत रिपोर्ट पढ़ सकते हैं। श्रीलंका के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर अपडेट के लिए यहाँ क्लिक करें।

आगे की संभावित सुनवाई और सुरक्षा इंतजाम

कोर्ट ने नामल राजापक्ष को आज ही अदालत में पेश करने का आदेश दिया है, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है। सुरक्षा को देखते हुए अदालत परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मामला अदालत में साबित हो जाता है, तो नामल राजापक्ष की राजनीतिक छवि को गहरा धक्का लगेगा। साथ ही, आगामी चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है। श्रीलंका की जनता इस मामले पर नज़र बनाए हुए है, क्योंकि यह देश के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की कसौटी होगी। आप इस खबर से जुड़ी अन्य जानकारी बीबीसी हिंदी पर भी प्राप्त कर सकते हैं।

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