बोइंग 787 ड्रीमलाइनर की खिड़कियां बार-बार बदली जा रही हैं
बोइंग के 787 ड्रीमलाइनर विमान में लगी इलेक्ट्रॉनिक रूप से डिम होने वाली खिड़कियां अब सबसे ज्यादा बदले जाने वाले केबिन पुर्जों में शामिल हो गई हैं। विमान रखरखाव विशेषज्ञों के अनुसार, ये खिड़कियां अक्सर खराब हो रही हैं। इस वजह से एयरलाइंस को इन्हें बदलने में भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक डिमिंग तकनीक में खामी
यह तकनीक पारंपरिक पर्दों से अलग है। इसमें बटन दबाकर बिजली से खिड़की का रंग बदला जा सकता है। लेकिन यह सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है। रखरखाव टीमों का कहना है कि यह समस्या वैश्विक स्तर पर देखी जा रही है। बोइंग कंपनी ने अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला है। कई एयरलाइंस को हर महीने दर्जनों खिड़कियां बदलनी पड़ रही हैं। इससे रखरखाव की लागत काफी बढ़ गई है। यात्रियों को भी इस वजह से परेशानी हो रही है। डिम न होने वाली खिड़कियां केबिन के आराम को प्रभावित करती हैं।
एयरलाइंस के सामने नई चुनौती
यह समस्या अब एयरलाइंस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। फ्लाइट ग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बोइंग 787 के सबसे कमजोर हिस्सों में से एक है। एयरलाइंस को इसके लिए अतिरिक्त बजट रखना पड़ रहा है। वहीं, यात्री अनुभव भी प्रभावित हो रहा है। कई यात्री शिकायत कर रहे हैं कि खिड़कियां ठीक से काम नहीं करतीं।
बोइंग का भविष्य और समाधान की जरूरत
बोइंग को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। बिना समाधान के यह समस्या कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है। रखरखाव विशेषज्ञों का मानना है कि बोइंग को तुरंत नई तकनीक पर काम करना चाहिए। तब तक एयरलाइंस को पुरानी तकनीक के साथ समझौता करना होगा। यह स्थिति विमानन उद्योग में एक सबक है कि नई तकनीकों का सावधानी से परीक्षण जरूरी है।
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