दुनिया का सबसे ताकतवर लड़ाकू विमान रूसी जासूसी विमान को रोकने

नॉर्वे के एफ-35 लड़ाकू विमानों ने रूसी विमान को रोका

नॉर्वे ने अपने वायु सीमा के पास रूसी गश्ती विमान को रोकने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया अभियान चलाया। यह मिशन इवनेस एयरबेस से एफ-35 लड़ाकू विमानों द्वारा संचालित किया गया। रूसी इल-38 पेट्रोल एयरक्राफ्ट को नॉर्वेजियन क्षेत्र के निकट पहचाना गया था। इस घटना ने क्षेत्र में सैन्य तनाव को फिर से उजागर कर दिया है।

क्विक रिएक्शन अलर्ट मिशन का विवरण

यह अभ्यास नॉर्वे की क्विक रिएक्शन अलर्ट तैयारियों का हिस्सा था। एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स ने रूसी विमान का सुरक्षित पता लगाया और उस पर नजर रखी। रूसी इल-38 एक समुद्री गश्त और एंटी-सबमरीन युद्धक विमान है। इस तरह की घटनाएं आर्कटिक क्षेत्र में आम होती जा रही हैं। नाटो देश लगातार सतर्क हैं।

नॉर्वेजियन सशस्त्र बलों ने इस मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों का पालन किया गया। रूसी विमान ने नॉर्वे की हवाई सीमा का उल्लंघन नहीं किया। लेकिन लड़ाकू विमानों को सावधानीवश तैनात किया गया। इस तरह के अभ्यास रक्षा तैयारियों के लिए आवश्यक माने जाते हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

यह घटना उत्तरी यूरोप में बढ़ते सैन्य संचालन को दर्शाती है। नॉर्वे आर्कटिक में एक प्रमुख नाटो सदस्य है। रूसी और नाटो विमानों के बीच ऐसी मुठभेड़ें पहले भी हो चुकी हैं। यह क्षेत्र रणनीतिक और संसाधन संपन्न है। दोनों पक्ष सैन्य उपस्थिति बनाए रखने को प्राथमिकता देते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना एक रूटीन सैन्य गतिविधि थी। फिर भी यह क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को रेखांकित करती है। नॉर्वे ने अपनी वायु निगरानी क्षमताओं में हाल में निवेश किया है। जेन्स डिफेंस न्यूज के अनुसार एफ-35 बेड़ा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी जारी रह सकती हैं।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि संचार चैनल खुले रहने चाहिए। यह दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक है। नाटो की आधिकारिक वेबसाइट सामूहिक सुरक्षा पर जोर देती है। नॉर्वे की यह कार्रवाई इसी नीति का एक हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में सभी देश सतर्क रहते हैं।

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