रयानएयर सीईओ की चेतावनी: ईरान युद्ध से ईंधन संकट, विज एयर और एयर बाल्टिक पर खतरा
रयानएयर के सीईओ माइकल ओ’लियरी ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के चलते ईंधन संकट गहरा सकता है। उनके अनुसार, कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। यह स्थिति विज एयर और एयर बाल्टिक जैसी कम लागत वाली एयरलाइंस को दिवालिया कर सकती है। ओ’लियरी ने यह बात एयरलाइन उद्योग के एक सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतें छोटी एयरलाइंस के लिए जानलेवा साबित होंगी।
ईंधन की कीमतों में उछाल से एयरलाइन उद्योग पर भारी दबाव पड़ेगा। ईरान संघर्ष और ईंधन कीमतों का प्रभाव पहले से ही वैश्विक बाजारों में देखा जा रहा है। ओ’लियरी ने बताया कि रयानएयर के पास ईंधन हेजिंग अनुबंध हैं, जो कुछ सुरक्षा प्रदान करते हैं। लेकिन विज एयर और एयर बाल्टिक ऐसे अनुबंधों पर निर्भर नहीं हैं। इसलिए वे जोखिम में हैं।
तेल की कीमतें 150 डॉलर तक पहुंचने की संभावना
ओ’लियरी का मानना है कि अगर ईरान में युद्ध छिड़ता है, तो तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। यह ऐतिहासिक स्तर होगा। तेल कीमत संकट 2025 से एयरलाइन इंडस्ट्री को भारी नुकसान होगा। पहले भी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान तेल की कीमतें 130 डॉलर तक पहुंची थीं। लेकिन अब स्थिति और खराब हो सकती है।
विज एयर और एयर बाल्टिक जैसी एयरलाइंस के पास सीमित वित्तीय संसाधन हैं। वे ईंधन की बढ़ती लागत का बोझ वहन नहीं कर सकते। ओ’लियरी ने चेतावनी दी कि इन एयरलाइंस के दिवालिया होने का खतरा बढ़ गया है। इससे यात्रियों को भी परेशानी होगी।
यूरोपीय एयरलाइंस पर संकट का असर
यूरोप की कई एयरलाइंस पहले से ही महामारी के बाद संघर्ष कर रही हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतें उनके लिए नई चुनौती बनेंगी। यूरोपीय एयरलाइंस पर ईंधन संकट का असर स्पष्ट है। रयानएयर जैसी बड़ी एयरलाइंस के पास कुछ सुरक्षा उपाय हैं, लेकिन छोटी एयरलाइंस असुरक्षित हैं।
ओ’लियरी ने कहा कि सरकारों को इस संकट से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए कदम उठाने की सलाह दी। अन्यथा, एयरलाइन उद्योग में बड़ी तबाही हो सकती है। यात्रियों को भी महंगे किराए का सामना करना पड़ेगा।
विज एयर और एयर बाल्टिक पर खतरा
विज एयर और एयर बाल्टिक यूरोप की प्रमुख कम लागत वाली एयरलाइंस हैं। लेकिन उनके पास ईंधन हेजिंग की सुविधा नहीं है। विज एयर दिवालिया होने का खतरा बढ़ गया है। यह स्थिति उनके लिए घातक साबित हो सकती है। ओ’लियरी ने कहा कि यह एयरलाइंस युद्ध के प्रभाव से बच नहीं पाएंगी।
इस संकट का असर सिर्फ एयरलाइंस तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पर्यटन उद्योग और यात्रियों को भी नुकसान होगा। यात्रा की लागत बढ़ेगी और कई मार्गों पर सेवाएं कम हो सकती हैं। ओ’लियरी ने चेतावनी दी कि यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करेगी।
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