शिवमोग्गा पैलेस में स्टाफ संकट, क्या होगा आगे?

शिवप्पा नायक पैलेस: स्टाफ की कमी से प्रभावित हुआ पर्यटक अनुभव

शिवमोग्गा में स्थित शिवप्पा नायक पैलेस हाल ही में व्यापक जीर्णोद्धार के बाद फिर से खुला है। यह ऐतिहासिक महल अब स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। इस कमी का सीधा असर पर्यटकों के अनुभव पर पड़ रहा है। महल का महत्वपूर्ण इतिहास है और यह राज्य का पहला स्मारक है जिसे स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत पुनर्विकसित किया गया।

पुनर्निर्मित बुनियादी ढांचे के बावजूद, यहां कर्मचारियों की संख्या अपर्याप्त है। पर्यटकों को गाइड और सुरक्षा कर्मियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। महल के अंदर प्राचीन वस्तुओं और कलाकृतियों की देखभाल के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता है। वर्तमान में केवल कुछ ही कर्मचारी तैनात हैं जो सभी क्षेत्रों को संभालने में असमर्थ हैं।

यह महल शिवमोग्गा में एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां आदिलशाही और केलाडी राजाओं की कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बावजूद, सुविधाएं और सेवाएं सीमित हैं। शिकायतें मिल रही हैं कि महल के दरवाजे समय पर नहीं खुलते। कई बार पर्यटकों को बिना किसी जानकारी के वापस लौटना पड़ता है।

स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत इस महल के जीर्णोद्धार पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। नई प्रकाश व्यवस्था, साउंड सिस्टम और वॉकवे बनाए गए। लेकिन अब इन सुविधाओं का उपयोग सीमित हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टाफ की कमी से यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी गरिमा खो सकता है। इस मुद्दे पर अधिक जानकारी के लिए कर्नाटक पर्यटन की आधिकारिक साइट देखें।

स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या को हल करने के वादे किए हैं। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए गाइड सेवा को भी बहाल किया जाएगा। स्मार्ट सिटी शिवमोग्गा की वेबसाइट पर इस योजना का विवरण उपलब्ध है। फिलहाल, यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे महल जाने से पहले संपर्क करें।